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बालोद शिक्षा घोटाले में डीपी कोसरे के पेटी सिस्टम ने उजागर की जिले की कड़वी हकीकत!

बालोद शिक्षा घोटाले में डीपी कोसरे के पेटी सिस्टम ने उजागर की जिले की हकीकत!

बालोद — छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में शिक्षा विभाग एक बार फिर कलंकित हुआ है। आत्मानंद स्कूल भर्ती प्रक्रिया में तत्कालीन नोडल अधिकारी रहे डीपी कोसरे द्वारा अपनी बेटी को नौकरी लगने के लिए रचा गया  घोटाले का नया अध्याय अब खुलेआम जिले की प्रशासनिक भ्रष्टाचार को उजागर कर रहा है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार हर पद के लिए बाकायदा पैसों का सौदा किया गया—कहीं  तीन पेटी तो कहीं पाँच पेटी तक का लेनदेन हुआ। यानी योग्यता नहीं, नोटों के बंडल तय कर रहे थे।चौंकाने वाली बात यह है कि यदि कार्रवाई निष्पक्ष होती, तो केवल सामाजिक विज्ञान शिक्षक का पद ही निरस्त नहीं होता, बल्कि संपूर्ण भर्ती प्रक्रिया रद्द की जाती। क्योंकि शिक्षक संहिता और प्रशासनिक आदेश के अनुसार किसी भी अभ्यर्थी के रिश्तेदार नोडल अधिकारी नहीं हो सकते यहां तो आवेदिका के पिता ही इस पद पर विराजमान थे परंतु जिला प्रशासन बालोद द्वारा ऐसा न करके केवल सामाजिक विज्ञान के पद को निरस्त किया जो जिला शिक्षा कार्यालय के भ्रष्टाचार को ढकने की एक घटिया कोशिश है। यह  कार्रवाई केवल यह साबित करती है कि रिश्वत की सीढ़ी पर चढ़े अफसर अब सच को कुचलने में जुटे हैं।सूत्र बताते हैं कि तत्कालीन नोडल रहे डीपी कोसरे की टीम ने पूरी भर्ती को ‘कमीशन आधारित व्यवसाय’ बना दिया था।

हर अभ्यर्थी से मोटी रकम वसूल कर योग्य उम्मीदवारों को हाशिए पर धकेला गया था। और तो और बालोद जिला में अपने पद स्थापना के दरमियान इतनी अनियमित भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी को अंजाम दिया है जिसे बता पाना असंभव है इस पूरे खेल में जिला प्रशासन की संदिग्ध चुप्पी और मिलीभगत भी संदेह पैदा करती है — आखिर किसके इशारे पर शिक्षा का यह सौदा हुआ?जिला पंचायत पर भी सवाल उठ रहे हैं कि उन्होंने इस घोटाले पर अब तक एक शब्द तक क्यों नहीं कहा। क्या यह मौन उनकी सहमति का संकेत है या सत्ता के दबाव का परिणाम? बालोद के नागरिक पूछ रहे हैं — आखिर कब तक “शिक्षा मंदिर” भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता रहेगा?यह मामला केवल भर्ती अनियमितता का नहीं, बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की सड़ांध का आईना है। डीपी कोसरे और शिक्षा विभाग पर कड़ी कार्रवाई के बिना बालोद का नाम हमेशा घोटालों की फेहरिस्त में दर्ज रहेगा।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कट्टर समर्थक राजेश साहू सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व जनपद सदस्य ने कहा कि

 “बालोद में अब पढ़ाई नहीं, पदों की खरीद-बिक्री हो रही है। शिक्षा विभाग ने बच्चों का भविष्य पेटियों में बंद कर दिया है। डीपी कोसरे जैसे अफसर जिले की साख को गिरा रहे हैं। अब यह भ्रष्टाचार का सिलसिला खत्म होना चाहिए।”

 

सामाजिक कार्यकर्ता मोहन निषाद का कहना है कि डीईओ खुद कह रही है कि कोसरे द्वारा अनियमितता बरती गई है जिस पर शिक्षक संहिता के तहत कार्यवाही किया जा सकता और कोसरे को हटा दिया गया है उसकी बेटी का चयन निरस्त किया गया है सवाल ये है कि यदि मामला घोटाले या आर्थिक अनियमितता से जुड़ा है, तो इसे E.O.W. (Economic Offence Wing) या A.C.B. (Anti-Corruption Bureau) को क्यों नहीं भेजा गया है। अगर भेजा है तो उसे सार्वजनिक नहीं किया है इससे साफ हो गया कि मधुलिका तिवारी डीपी कोसरे को 10 लाख के नारियल का चढ़ावा लेकर विभागीय कार्यवाही से बचना चाहती है

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