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धान खरीदी व्यवस्था को मिलेगी लोहे की ढाल — बालोद में कलेक्टर ने एस्मा लागू कर दी सख्त चेतावनी, लापरवाही पर तत्काल बर्खास्तगी

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी प्रक्रिया को निर्बाध एवं सतत गति देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने बड़ा और कठोर कदम उठाया है। कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने धान खरीदी कार्य को अति आवश्यक सेवाओं की श्रेणी में सम्मिलित करते हुए पूरे जिले में एस्मा (आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम) लागू करने का आदेश जारी कर दिया है। यह निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जिले के सैकड़ों किसान हर साल बड़ी उम्मीदों के साथ धान लेकर खरीदी केंद्र पहुंचते हैं, और उनके हितों की रक्षा करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि जिले के सभी धान खरीदी केंद्रों में संचालन, निगरानी और व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी निर्धारित कर दी गई है। प्रशासन का मानना है कि कार्य की गंभीरता, संवेदनशीलता और किसानों की समयबद्ध जरूरतों को देखते हुए खरीदी प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही, टालमटोल या अनुपस्थित रहने की स्थिति को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जो भी अधिकारी या कर्मचारी अपनी ड्यूटी स्थल पर निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं मिलेगा, उसके विरुद्ध सीधे बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने इन सेवाओं को बाधित करने वाले किसी भी प्रकार के आंदोलन, हड़ताल, कार्य बहिष्कार या अवरोध को भी एस्मा के तहत प्रतिबंधित कर दिया है। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसानों को किसी भी तरह की असुविधा न हो और खरीदी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, समयबद्ध और सुचारु ढंग से संचालित हो।कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया है कि धान खरीदी केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसान वर्ग के आर्थिक भविष्य से जुड़ी अत्यंत महत्वपूर्ण व्यवस्था है। ऐसे में किसी भी प्रकार की शिथिलता किसानों की आजीविका पर सीधा प्रहार मानी जाएगी। यही कारण है कि प्रशासन ने इस बार धान खरीदी प्रणाली को “लोहे की ढाल” देने का निर्णय लिया है, ताकि किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो पाए।जिला प्रशासन की इस कठोर परंतु किसान हितैषी पहल से उम्मीद जताई जा रही है कि बालोद जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी कार्य पूरी दक्षता और प्रतिबद्धता के साथ संचालित होगा। यह निर्णय न सिर्फ प्रशासनिक दृढ़ता को दर्शाता है, बल्कि किसानों के प्रति संवेदनशीलता और उनके हितों के प्रति जिम्मेदारी का सशक्त संदेश भी देता है।

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