लकवा ग्रस्त शिक्षक से चल रही शिक्षा — शिक्षा विभाग की चुप्पी से कोचेरा के बच्चों का भविष्य अधर में!

बालोद:- छत्तीसगढ़ में जिला बालोद शिक्षा के मंदिरों में जब शिक्षक स्वयं लाचार हो जाएं और विभाग आंख मूंद ले, तब सवाल उठना लाज़मी है कि बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? बालोद जिले के संकुल केंद्र कोचेरा अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला कोचेरा में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।विद्यालय में कुल 82 विद्यार्थी पंजीकृत हैं, जिनकी पढ़ाई अब भगवान भरोसे चल रही है। यहां केवल तीन शिक्षक पदस्थ हैं, लेकिन उनमें से एक शिक्षक लोमन सिंह, लंबे समय से लकवा (पक्षाघात) जैसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त हैं। चिकित्सा रिपोर्टों के अनुसार वे शिक्षण कार्य करने में असमर्थ हैं, फिर भी शिक्षा विभाग ने अब तक उनके स्थान पर वैकल्पिक शिक्षक की कोई व्यवस्था नहीं की है। परिणामस्वरूप विद्यालय में शिक्षण कार्य बुरी तरह प्रभावित है।ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे स्कूल तो आते हैं, पर कक्षाएं नियमित रूप से नहीं लग पातीं। दो शिक्षकों पर एक साथ सभी कक्षाओं की जिम्मेदारी है। नतीजा यह है कि पहली से पाँचवीं तक के बच्चों को बुनियादी ज्ञान भी ठीक से नहीं मिल पा रहा। एक अभिभावक ने बताया — “हमारे बच्चे रोज स्कूल जाते हैं, पर सही पढ़ाई नहीं हो रही। इतने बच्चों पर दो शिक्षक कैसे ध्यान देंगे?”जानकार सूत्रों के मुताबिक, इस स्थिति की जानकारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों तक कई बार लिखित और मौखिक रूप से दी जा चुकी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिला। यह न केवल शिक्षा के अधिकार अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि सरकारी तंत्र की उदासीनता का भी प्रतीक है।सवाल यह है कि जब एक शिक्षक स्वास्थ्य कारणों से कार्य करने में असमर्थ हैं, तो विभाग क्यों नए शिक्षक की अस्थायी या स्थायी पदस्थापना नहीं कर रहा? क्या यह प्रशासनिक लापरवाही नहीं कि 82 बच्चों की पूरी शैक्षणिक नींव खतरे में डाल दी जाए?जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में विभाग को तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए — या तो अस्थायी रूप से किसी शिक्षक को इस विद्यालय में प्रतिनियुक्त करें या फिर स्थायी पदस्थापना करें, ताकि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो।वर्तमान हालात यह दर्शा रहे हैं कि शिक्षा विभाग का तंत्र सिर्फ कागजों पर सक्रिय है, जबकि जमीनी सच्चाई बिल्कुल अलग है। जिस विद्यालय में बच्चे भविष्य की नींव रख रहे हैं, वहां शिक्षक व्यवस्था की यह हालत सरकार के “गुणवत्तापूर्ण शिक्षा” के दावे पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।अब जरूरत है कि विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए लोमन सिंह के स्थान पर नए शिक्षक की तत्काल नियुक्ति करे, ताकि कोचेरा के बच्चों को भी वह शिक्षा मिल सके, जिसकी उन्हें उम्मीद है — और जो उनका संवैधानिक अधिकार है।



