मीडिया जगत का कलंक भटरी नामक रंगबाज का घिनौना चेहरा उजागर

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में मीडिया जगत का भटरी नामक इस शीर्षक के साथ सामने आए आरोपों में कहा गया है कि तथाकथित तौर पर किसी पोर्टल न्यूज़ के स्टेट हेड बता कर मीडिया कर्मी कहलाने वाला रंगबाज, चिड़ीमार जो एक समय दहेज के लिए प्रताड़ित करने वाला दानव था, आज समाज में शरीफ का चोला ओढ़कर ईमानदारी का मुखौटा लगाकर मीडिया जगत को बदनाम करने की साजिश अपने कुछ तथाकथित अन्य प्रदेश के मीडिया कर्मी के साथ मिलकर बालोद जिला को राष्ट्रीय स्तर में बदनाम कर रहे हैं। खुद तो भ्रष्टाचारी है, दूसरों के ऊपर कीचड़ उछाल रहा है—ऐसा आरोप स्थानीय स्तर पर उठ रहा है।सूत्रों के अनुसार, प्राथमिक पाठशाला तक पढ़ाई करके मीडिया कर्मी बनकर अपने आप को पोर्टल चैनल का—जिनका किसी भी तरह का अस्तित्व नहीं है—सर्वे-सर्वा बताकर लोगों से उगाही करने वाला अंगूठा छाप मीडिया कर्मी जिसे लोग भटरी के नाम से जानते हैं, वह कथित तौर पर दबाव बनाकर आर्थिक लाभ लेने की कोशिश करता रहा है। यह नाम इसके इसी आदत के वजह से कहा जाता है—ऐसा स्थानीय लोगों का कहना है। आरोप है कि अभी तक बालोद जिला के कई संगठनों पर अपनी सदस्यता ग्रहण कर लूटने का ही काम किया है, और अलग-अलग मंचों पर खुद को प्रभावशाली बताकर भय का वातावरण बनाया है। तरुण नाथ योगी सामाजिक कार्यकर्ता एवं हिंद सेना के प्रदेश संयोजक ने भी कथित तौर पर यह कहा कि पत्रकारिता करते हुए पत्रकारों को ही जगह-जगह जाकर बदनाम कर चाटुकारिता करके लूट कर अपना जेब भरता है। वास्तव में यह व्यक्ति इसी पर अपना जीवन यापन करता है—ऐसा कथन सामने आया है। दबाव डाल कर, डरा-धमकाकर अवैध उगाही इनका काम ही है—ऐसा आरोप कई संगठनों और नागरिकों द्वारा लगाया जा रहा है, जिनका कहना है कि ऐसे तत्व मीडिया की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाते हैं।स्थानीय सामाजिक संगठनों का कहना है कि इस तरह के कृत्य न केवल ईमानदार पत्रकारों की छवि धूमिल करते हैं, बल्कि आम जनता के भरोसे को भी चोट पहुंचाते हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि स्वयं को स्टेट हेड बताकर, तथाकथित पहचान और संपर्कों का हवाला देकर, भय और भ्रम फैलाकर उगाही की जाती है। कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि आलोचना करने वालों को बदनाम करने की कोशिशें की जाती हैं, ताकि विरोध की आवाज दबाई जा सके।हालांकि, संबंधित पक्ष पर लगे इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठ रही है। जानकारों का कहना है कि मीडिया जगत की साख बचाने के लिए ऐसे मामलों में तथ्यों की पड़ताल, दस्तावेज़ी प्रमाण और विधिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई आवश्यक है। संगठनों ने अपील की है कि प्रशासन और मीडिया संस्थाएं कथित फर्जी पोर्टल, अवैध उगाही और दबाव बनाने जैसे आरोपों की जांच कर सत्य सामने लाएं, ताकि दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई हो इस पूरे प्रकरण को लेकर बालोद में चर्चा का माहौल है। नागरिकों का कहना है कि मीडिया का नाम लेकर गलत काम करने वालों पर सख्त संदेश जाना चाहिए, ताकि पत्रकारिता की गरिमा बनी रहे और समाज में विश्वास कायम



