पारा-पारा स्वास्थ्य की मशाल: मितानिनों के संकल्प से सुरक्षित होता बचपन, सशक्त होती मातृत्व व्यवस्था”

रिपोर्टर:- रिखी साहू
बालोद/पलारी:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में गुरूर ब्लॉक के ग्राम पड़कीभाट की मिट्टी में जब स्वास्थ्य, सेवा और संवेदना का संगम उतरता है, तब उसका नाम मितानिन बन जाता है। शासन की योजनाओं को कागज़ से निकालकर ज़मीन तक पहुँचाने वाली यही वे सशक्त महिलाएँ हैं, जो न तो मौसम देखती हैं, न सुविधा—बस देखती हैं ज़रूरत। इसी जीवंत कड़ी के रूप में मितानिन प्रेरक पूर्णिमा साहू ने ग्राम पड़कीभाट में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता को लेकर एक व्यापक और उद्देश्यपूर्ण बैठक का आयोजन कर यह संदेश दिया कि यदि मितानिन सक्रिय है, तो गांव स्वस्थ है।
आंगनबाड़ी केंद्र में आयोजित इस बैठक में 29 बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। विषय केवल जानकारी तक सीमित नहीं रहे, बल्कि बच्चों के भविष्य, माताओं की सुरक्षा और पूरे गांव की जीवनशैली को लेकर गंभीर संवाद हुआ। बच्चों की निरंतर निगरानी, समय पर पोषण आहार, स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता, शारीरिक गतिविधियों पर विशेष ध्यान—इन सभी पहलुओं को व्यवहारिक उदाहरणों के साथ समझाया गया। यह केवल बैठक नहीं थी, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य चेतना का जीवंत प्रशिक्षण था।
पूर्णिमा साहू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मितानिन कोई साधारण कार्यकर्ता नहीं, बल्कि सरकार द्वारा प्रशिक्षित स्वास्थ्य दूत है। टीकाकरण, संस्थागत प्रसव, कुपोषण की पहचान, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, प्राथमिक उपचार, मलेरिया जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में मच्छरदानी वितरण, पल्स पोलियो अभियान, कृमि मुक्ति, कुपोषण मुक्ति और मातृत्व सुरक्षा—इन सभी योजनाओं की आत्मा मितानिनों के परिश्रम से ही गांव तक पहुँचती है। उन्होंने मितानिनों से पूरी ईमानदारी, निरंतरता और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का आह्वान किया।बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि मितानिनों की सक्रियता ने ग्रामीण स्वास्थ्य परिदृश्य को बदला है। शिशु मृत्यु दर में आई उल्लेखनीय गिरावट इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। जहां विभागीय अमला हर समय नहीं पहुँच पाता, वहां मितानिन पारा-मुहल्लों में बारिश, धूप और अंधेरी रातों की परवाह किए बिना पहुँचती है। मामूली उपचार से लेकर गंभीर स्थिति में मरीज को स्वास्थ्य केंद्र तक पहुँचाने तक, उनकी तत्परता जीवन रक्षक बन जाती है।कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में भी मितानिनों की भूमिका निर्णायक रही है। पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) के माध्यम से अनेक गंभीर कुपोषित बच्चों को नया जीवन मिला है। एक माह से पांच वर्ष तक के बच्चों को विशेष देखभाल, संतुलित पोषक आहार और निःशुल्क उपचार देकर उन्हें सामान्य जीवन की ओर लौटाया गया। यह आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि उन माताओं की राहत भरी सांसें हैं, जिनकी गोद फिर से मुस्कान से भर उठी।
बैठक के दौरान मितानिनों को यह संदेश भी दिया गया कि स्वास्थ्य केवल दवा नहीं, बल्कि जागरूकता है। स्वच्छता, साफ पानी, संतुलित भोजन और समय पर उपचार—इन चार स्तंभों पर ही स्वस्थ समाज खड़ा होता है। ग्राम पड़कीभाट की मितानिनें इसी सोच के साथ हर घर, हर परिवार तक पहुँचने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रही हैं।
इस अवसर पर ग्राम पड़कीभाट की भगवती, तारा, आदि सहित अन्य मितानिनें उपस्थित रहीं। सभी ने एक स्वर में यह दोहराया कि मितानिन केवल योजना की वाहक नहीं, बल्कि भरोसे की पहचान है।आज जब स्वास्थ्य व्यवस्था की जड़ें गांवों में मजबूत होती दिख रही हैं, तो उसके पीछे मितानिनों का निस्वार्थ श्रम, साहस और मानवीय संवेदना है। यही कारण है कि पारा-पारा जलती यह सेवा की मशाल, आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य का रास्ता रोशन कर रही है।



