ठेकेदार आशीष तिवारी के भ्रष्टाचारी की जड़ें बालोद जिले में जनता के पैसे का हो रहा है खेल!

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में गुरूर विकासखंड के पडकीभाट–डोटोपार मार्ग पर खारून नदी के डोंगाघाट में बन रहा एनिकट-स्टॉप डैम कोई सामान्य प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की एक जीती-जागती मिसाल है। सूत्रों से पता चला है कि 2 करोड़ 23 लाख रुपये की लागत से शुरू हुआ यह काम अब प्रशासन की लापरवाही, तकनीकी खामियों और पारदर्शिता की कमी का शिकार बन चुका है। जनता के टैक्स से बने फंड का यहां खुलेआम दुरुपयोग हो रहा है, और ग्राम पंचायत का सरपंच तो जैसे सोया हुआ है – न साइट पर जाता, न काम की निगरानी करता। इससे साफ जाहिर है कि कहीं न कहीं कमीशन इन तक भी पहुंच गया है, वरना इतनी लापरवाही कैसे बर्दाश्त की जाती?
ठेकेदार आशीष तिवारी भ्रष्टाचार का चेहरा!
अब जरा ठेकेदार आशीष तिवारी पर नजर डालें, जो बालोद जिले में विवादों का पर्याय बन चुके हैं। यह वही शख्स हैं जिनका नाम कई सरकारी ठेकों में अनियमितताओं से जुड़ा है। डोंगाघाट प्रोजेक्ट में काम की इतनी तेज है कि लगता हैएक ही महीने में एनीकेट को बनाकर रख देगा कुछ – सामग्री घटिया और गुणवत्ता पर सवाल। लेकिन तिवारी साहब को क्या फर्क पड़ता? उनके लिए तो यह पैसा बनाने का एक और मौका है। इससे साफ है कि उनका ट्रैक रेकॉर्ड साफ नहीं, बल्कि दागदार है आशीष तिवारी का नाम सिर्फ बालोद तक सीमित नहीं पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में विवादास्पद रहा है। लेकिन छत्तीसगढ़ में ठेकों के लिए अन्य जानकारी देना सवालों के घेरे में है। क्या यह क्रॉस-स्टेट नेटवर्क है जहां ठेके हथियाने के लिए नियमों की धज्जियां उड़ाई जाती हैं? छत्तीसगढ़ में स्टेशन हाउस ऑफिसर के खिलाफ उनका मुकदमा भी यही इशारा करता है कि जांच से बचने की कोशिशें चल रही हैं।और तो और, कई स्कैंडल्स में तिवारी जैसे नाम उछले हैं, जहां सप्लीमेंटरी चालान पेश किए गए – भले ही अप्रत्यक्ष, लेकिन ठेकेदारी की दुनिया में ऐसे कनेक्शन आम हैं।बालोद में पहले भी सड़क निर्माण और नदी प्रोजेक्ट्स में उनके ठेके पर गुणवत्ता के आरोप लगे, जहां काम अधर में लटक गए और बजट ओवररन हुआ। यह पैटर्न है – ठेका लो, काम आधा करो, कमीशन खाओ, और अगले प्रोजेक्ट पर कूदो!
सरपंच की भूमिका लापरवाही या साजिश?
ग्राम पंचायत का सरपंच, जो गांव का पहला प्रतिनिधि होना चाहिए, यहां पूरी तरह निष्क्रिय है। क्या उन्हें फुर्सत नहीं कि साइट पर जाकर जांच करें? या फिर तिवारी जैसे ठेकेदारों से मिलीभगत है? जनता के पैसे से बने इस एनिकट का उद्देश्य सिंचाई और जल संरक्षण था, लेकिन अब यह बाढ़ में बहने को तैयार लगता है। अगर सरपंच जागते नहीं, तो ग्रामीणों को खुद आगे आना होगा – ग्राम सभा बुलाएं, RTI दाखिल करें, और ACB जैसी एजेंसियों को सूचित करें। भ्रष्टाचार की यह चेन सरपंच से शुरू होकर प्रशासन तक जाती है, और तिवारी जैसे लोग इसका फायदा उठाते हैं।
जनता का आक्रोश अब चुप नहीं रहेंगे!
यह सिर्फ एक डैम नहीं, बल्कि विकास की गला घोंटना है। आशीष तिवारी के विवादों की फेहरिस्त लंबी है – छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के कई मुकदमों से लेकर मध्य प्रदेश के ठेकेदारी घपलों तक। अगर हम चुप रहे, तो ऐसे लोग और मजबूत होंगे। समय है आवाज उठाने का – सोशल मीडिया पर शेयर करें, स्थानीय मीडिया को बताएं, और जांच की मांग करें। जनता का पैसा जनता के लिए है, न कि ठेकेदारों की जेब भरने के लिए! जागो, लड़ो, और इस भ्रष्ट सिस्टम को उखाड़ फेंको।



