हमर छत्तीसगढ़

शासकीय ज़मीन पर दबंगई की कोशिश नाकाम, धमकी और गालीबाज़ी पड़ा भारी — कमलेश जैन पर धारा 296 व 315(3) के तहत अपराध दर्ज

 

बालोद:- छत्तीसगढ़ में बालोद जिले के डौण्डीलोहारा नगर से सामने आई घटना ने यह साफ कर दिया है कि सार्वजनिक संपत्ति पर कब्जा जमाने की मानसिकता अब भी कुछ लोगों के भीतर जहर की तरह पल रही है। वार्ड क्रमांक 15 की आदिवासी कॉलोनी में स्थित शासकीय भूमि खसरा नंबर 124, रकबा लगभग 25 डिसमिल पर जनहित में कला मंच का निर्माण कार्य चल रहा है। यह निर्माण ग्राम कोटेरा निवासी ठेकेदार द्वारका राम देवांगन द्वारा विधिवत प्रक्रिया के तहत कराया जा रहा है। लेकिन 22 जनवरी 2026 की सुबह लगभग 11 बजे जिस तरह से एक व्यक्ति ने वहां पहुंचकर उत्पात मचाया, उसने कानून व्यवस्था को खुली चुनौती दी।डौण्डीलोहारा निवासी कमलेश जैन बिना किसी वैध दस्तावेज के निर्माण स्थल पर पहुंचा और खुद को जमीन का मालिक बताकर कार्य रोकने का प्रयास करने लगा। बात यहीं तक सीमित नहीं रही। उसने ठेकेदार द्वारका राम देवांगन को मां-बहन की भद्दी, अश्लील और अमर्यादित गालियां दीं तथा खुलेआम जान से मारने की धमकी देकर दहशत फैलाने की कोशिश की। सार्वजनिक स्थान पर इस तरह का व्यवहार न केवल आपराधिक है, बल्कि सामाजिक मूल्यों पर सीधा हमला है।जब मौके पर मौजूद लोगों ने स्पष्ट रूप से कहा कि संबंधित भूमि शासकीय है और यदि दावा है तो कागजात प्रस्तुत किए जाएं, तब कमलेश जैन का उग्र रूप और भी खतरनाक हो गया। उसने सवाल उठाने वाले व्यक्ति को भी अश्लील शब्दों से अपमानित किया और हत्या की धमकी दोहराई। यह घटना दर्शाती है कि कुछ लोग डर और गाली को ही अपना अधिकार समझ बैठे हैं।इस पूरे घटनाक्रम को प्रत्यक्षदर्शी शिव शंकर सिंह तथा निर्माण कार्य में लगे कमलेश कुमार पटेल ने अपनी आंखों और कानों से देखा-सुना। आम जगह पर की गई इस गाली-गलौज से न केवल पीड़ित बल्कि वहां मौजूद अन्य नागरिकों को भी गहरा आघात पहुंचा। यह कोई निजी विवाद नहीं था, बल्कि सार्वजनिक शांति और व्यवस्था को कुचलने की कोशिश थी।मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कमलेश जैन के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 296 (सार्वजनिक स्थान पर अश्लील गाली-गलौज) तथा धारा 315(3) (जान से मारने की धमकी) के तहत अपराध दर्ज किया है। यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि कानून अभी जीवित है और खुलेआम गुंडागर्दी करने वालों को जवाब देने में सक्षम है।सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर शासकीय भूमि पर इस तरह के निराधार दावे और दबंगई की हिम्मत कैसे होती है? कला मंच जैसे निर्माण किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज, आदिवासी समुदाय और क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान के लिए बनाए जाते हैं। ऐसे कार्यों में बाधा डालना सीधे तौर पर सामाजिक विकास को रोकने का षड्यंत्र है।कमलेश जैन का कृत्य यह साबित करता है कि वह कानून का भय भूल चुका था। लेकिन अब उसके खिलाफ दर्ज धाराएं यह स्पष्ट संदेश देती हैं कि सार्वजनिक संपत्ति पर अवैध दखल, अश्लीलता और धमकी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं होती, तो ऐसे तत्व और भी बेलगाम हो जाते।अब प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारी है कि मामले को सिर्फ कागजों तक सीमित न रखा जाए। दोषी के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई कर यह संदेश दिया जाए कि शासकीय जमीन किसी की निजी जागीर नहीं है।सार्वजनिक हित के कार्यों को रोकने वालों के लिए कानून में कोई नरमी नहीं होनी चाहिए।यह घटना पूरे समाज के लिए चेतावनी है। अगर आज कला मंच पर दबंगई दिखाई गई, तो कल स्कूल, अस्पताल और अन्य जनसुविधाएं भी निशाने पर होंगी। इसलिए जरूरी है कि ऐसे मामलों में सख्ती दिखाई जाए और कानून का भय फिर से स्थापित किया जाए।अब साफ है—गाली, धमकी और झूठे दावे के बल पर कुछ भी हासिल नहीं होगा। शासकीय संपत्ति की रक्षा होगी, जनहित के कार्य चलते रहेंगे और कानून तोड़ने वालों को उसी भाषा में जवाब मिलेगा, जो कानून की भाषा है।

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