शासन-प्रशासन की वजह से फल-फूल रहा अवैध गांजा कारोबार, अरकार नशे में फंसा

रिपोर्टर :- उत्तम साहू
बालोद / पलारी :- भारतीय कानून के तहत छत्तीसगढ़ में गांजा रखना, बेचना या सेवन करना दंडनीय अपराध है। नशीले पदार्थों के उपयोग और वितरण को नियंत्रित करने के लिए कड़े प्रावधान बनाए गए हैं। NDPS Act के तहत गांजा (कैनबिस) रखना, बेचना, खरीदना, उगाना और सेवन करना अपराध की श्रेणी में आता है।
कानून के अनुसार
1 किलो से कम मात्रा रखने पर 6 माह से 1 वर्ष तक की सजा और 10 हजार रुपये तक जुर्माना,
1 से 20 किलो तक रखने पर 10 वर्ष तक की कठोर कैद और 1 लाख रुपये तक जुर्माना,
20 किलो से अधिक मात्रा पर 10 से 20 वर्ष तक की सजा और 1 से 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
गांजे की तस्करी को अत्यंत गंभीर अपराध माना गया है, जिसमें अधिकतम 20 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।
अरकार बना अवैध कारोबार का केंद्र
बालोद जिले के गुरूर विकासखंड का ग्राम अरकार इन दिनों अवैध गतिविधियों को लेकर चर्चा में है। थाना सनौद क्षेत्र अंतर्गत आने वाले लगभग 25 गांवों में अरकार को सबसे अधिक संवेदनशील बताया जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार अरकार निवासी दिलीप कोसरे पिता चन्द्रकुमार कोसरे पर लंबे समय से अवैध रूप से गांजा बेचने के आरोप लग रहे हैं। बताया जा रहा है कि इनके पास छोटी मात्रा नहीं बल्कि बड़ी मात्रा में गांजा उपलब्ध रहता है। आरोप है कि इनके घर पर ही अवैध रूप से गांजा बेचने की व्यवस्था बनाई गई है, जहां दिन-रात खरीद-फरोख्त होती रहती है तथा सामने ही गांजा सेवन करने वालों की भीड़ लगी रहती है।
आसपास के गांवों तक फैल रहा नशे का जाल
ग्रामीणों का कहना है कि अरकार ही नहीं बल्कि आसपास के गांवों और दूर-दराज क्षेत्रों से लोग यहां गांजा खरीदने आते हैं। कई लोग यहां से गांजा लेकर दूसरे गांवों में बेचने भी जाते हैं। आरोप है कि इस अवैध कारोबार पर कोई रोक नहीं लग पा रही और तस्करी अन्य राज्यों से भी हो रही है।
लोगों का कहना है कि जहां सरकारी शराब दुकान से अधिक मात्रा में शराब ले जाने वालों पर कार्रवाई होती है, वहीं गांजा कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से कानून व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
नशे से बढ़ रही अपराध और सामाजिक समस्याएँ
ग्रामीणों का आरोप है कि गांजे की आसान उपलब्धता से युवाओं में नशे की लत तेजी से बढ़ रही है। इसका असर खेती-किसानी, मजदूरी, पढ़ाई और छोटे व्यवसायों पर पड़ रहा है।नशे के कारण चोरी, मारपीट, झगड़े, छिनतई और गाली-गलौच की घटनाओं में वृद्धि होने की बात भी सामने आ रही है।
महिलाओं और छात्राओं को भी असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि जिस गली में गांजा बेचा जाता है वहां दिन-रात नशेड़ियों की भीड़ लगी रहती है।
गांव के जिम्मेदार लोग भी खामोश
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में शिक्षित लोग, जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार नागरिक मौजूद हैं, लेकिन नशे के खिलाफ बोलने से विवाद या दुश्मनी होने का डर बना रहता है। इसी वजह से लोग खुलकर विरोध करने से बच रहे हैं।



