हमर छत्तीसगढ़

“संकल्प नहीं, छलावा बजट” – रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आदिवासियों पर कुठाराघात :- दीपक आरदे

रिपोर्टर :- मीनू साहू 

बालोद: छत्तीसगढ़ सरकार का बजट 2026-27 विकास का रोडमैप नहीं, बल्कि जनभावनाओं के साथ किया गया सीधा विश्वासघात है। यह आरोप आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयुक्त सचिव दीपक आरदे ने लगाते हुए कहा कि किसानों, युवाओं, महिलाओं, आदिवासियों और अनियमित कर्मचारियों की उम्मीदों को निर्ममता से रौंदा गया है।

आरदे ने कहा कि प्रदेश की रीढ़ माने जाने वाले कृषकों के लिए ठोस राहत का अभाव है। खेती की लागत बढ़ती जा रही है, मगर समर्थन और सुरक्षा का स्पष्ट खाका नदारद है। अस्थायी कर्मियों के स्थायीकरण पर चुप्पी साध ली गई है। महिला सुरक्षा, पोषण और स्वावलंबन जैसे गंभीर विषयों पर कोई ठोस पहल नहीं दिखती। रसोइया संघ की वर्षों पुरानी मांगों को फिर दरकिनार कर दिया गया।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पिछले वर्ष पेट्रोल पर वैट में मामूली कटौती को उपलब्धि बताया गया था, इस बार आम नागरिक को राहत का एक भी ठोस संकेत नहीं मिला। ग्रामीण आवास योजना के लिए भारी-भरकम घोषणाएं हुईं, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि हजारों परिवार आज भी पक्की छत के इंतजार में हैं। पंचायत मद में बड़ी राशि आवंटित होने के बावजूद पात्र हितग्राहियों तक लाभ नहीं पहुंचा।

“बालोद को शून्य, उद्योगपतियों को वरदान” – पंकज जैन

जिला मीडिया प्रभारी पंकज जैन ने बजट को क्षेत्रीय असंतुलन का दस्तावेज करार दिया। उन्होंने कहा कि बस्तर और सरगुजा को विकास के नाम पर प्रतीकात्मक घोषणाएं थमा दी गईं, जबकि बालोद जिले का नाम तक शामिल नहीं किया गया। न मेडिकल कॉलेज की घोषणा, न डीएड-बीएड संस्थान की स्थापना—जिले की शैक्षणिक जरूरतों को पूरी तरह अनदेखा किया गया।स्वास्थ्य क्षेत्र में पांच नए मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा को जुमला बताते हुए जैन ने कहा कि जब मौजूदा संस्थानों में प्राध्यापकों के पद रिक्त हैं और प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल मेकाहारा में मशीनें ठप पड़ी हैं, तब नई इमारतों की बात करना दिखावा है। गंभीर जांच सुविधाएं बाधित हैं, जिससे मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए प्रावधान वास्तविक जरूरतों की तुलना में अपर्याप्त है, जबकि संविदा कर्मियों की मांगें वर्षों से लंबित हैं।युवाओं के नाम पर बड़ी राशि घोषित कर दी गई, परंतु रोजगार सृजन की ठोस नीति सामने नहीं आई। प्रशिक्षित बीएड-डीएड अभ्यर्थी महीनों से आंदोलनरत हैं, फिर भी समाधान की जगह दमनात्मक रवैया अपनाया गया। रानी दुर्गावती योजना की रूपरेखा अस्पष्ट है और रसोई गैस पर राहत के वादे का बजट में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं दिखता।आम आदमी पार्टी ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि यह बजट जनहित से विमुख, आंकड़ों की बाजीगरी और प्राथमिकताओं की विफलता का प्रतीक है। प्रदेश की जनता को ठोस परिणाम चाहिए, खोखली घोषणाएं नहीं।

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