पलारी से भूपेश बघेल का हमला सत्ता का अहंकार टूटा, जनता ने भाजपा को दिया करारा जवाब
शपथ ग्रहण मंच से पूर्व मुख्यमंत्री ने साधा निशाना, हार पर जवाबदेही तय नहीं होने पर उठाए सवाल

संपादक :- मीनू साहू
बालोद :- छत्तीसगढ़ में बालोद जिला के प्रसिद्ध नगर पंचायत पलारी में नवनिर्वाचित अध्यक्ष यानेश साहू एवं दस पार्षदों के शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस नेताओं ने राज्य सरकार और भाजपा संगठन पर जमकर हमला बोला। कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Deepak Baij सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी रही।
समारोह को संबोधित करते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि पलारी का जनादेश केवल एक स्थानीय निकाय का परिणाम नहीं, बल्कि सत्ता के दंभ और प्रशासनिक दबाव के खिलाफ जनता का स्पष्ट संदेश है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव जीतने के लिए भाजपा ने सरकारी मशीनरी से लेकर संगठन की पूरी ताकत झोंक दी थी। प्रदेश के बड़े नेताओं, मंत्रियों और शीर्ष पदों पर बैठे लोगों ने लगातार प्रचार किया, संसाधनों का खुलकर उपयोग हुआ, लेकिन इसके बावजूद जनता ने भाजपा को नकार दिया।
बघेल ने कहा कि लोकतंत्र में हार और जीत दोनों को स्वीकार करना पड़ता है, लेकिन भाजपा की सबसे बड़ी विफलता यह है कि पराजय के बाद भी कोई जवाबदेही तय नहीं की गई। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब जीत मिलती है तो उसका श्रेय लेने वालों की कतार लग जाती है, लेकिन हार होने पर जिम्मेदारी लेने वाला कोई नजर नहीं आता। यह राजनीतिक नैतिकता के गिरते स्तर का उदाहरण है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि प्रदेश में जनता से जुड़े मूल मुद्दों को पीछे छोड़कर केवल प्रचार और प्रबंधन की राजनीति की जा रही है। विकास, रोजगार, किसानों की समस्याएं और स्थानीय जरूरतें हाशिये पर धकेली जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जनता अब केवल घोषणाओं और दावों से प्रभावित होने वाली नहीं है, बल्कि जमीन पर काम और जवाबदेही चाहती है।
उन्होंने पलारी के मतदाताओं को धन्यवाद देते हुए कहा कि यहां के लोगों ने यह साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता का होता है, न कि सत्ता की ताकत का। जनता जब ठान लेती है तो बड़े से बड़ा राजनीतिक समीकरण और सत्ता का प्रभाव भी टिक नहीं पाता।
कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष यानेश साहू और सभी पार्षदों को शुभकामनाएं देते हुए नगर विकास, पारदर्शिता और जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। वहीं राजनीतिक गलियारों में इस समारोह को भाजपा सरकार के खिलाफ कांग्रेस के आक्रामक अभियान की शुरुआत के रूप में भी देखा जा रहा है।



