हमर छत्तीसगढ़

प्रशासनिक फैसले पर फूटा जनाक्रोश, खलारी में चक्का जाम से थमा गुंडरदेही-धमतरी मार्ग ग्रामीणों की चेतावनी जनभावनाओं की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन होगा और उग्र

ग्रामीणों की चेतावनी जनभावनाओं की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन होगा और उग्र

 

संपादक :- मीनू साहू 

बालोद :- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में प्रशासनिक निर्णयों को लेकर बढ़ता असंतोष अब खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगा है। गुंडरदेही विकासखंड के ग्राम पंचायत खलारी में बाईपास मार्ग के समीप बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने जिला प्रशासन के एक विवादित निर्णय के विरोध में चक्का जाम कर गुंडरदेही-धमतरी मुख्य मार्ग को अवरुद्ध कर दिया। इस प्रदर्शन के चलते यातायात प्रभावित हुआ और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित मामले में स्थानीय नागरिकों की राय को महत्व नहीं दिया गया तथा जनहित से जुड़े पहलुओं को दरकिनार कर निर्णय थोपने का प्रयास किया गया। इसी नाराजगी के कारण लोगों ने एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया। आंदोलन में महिलाओं, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों की भी उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि असंतोष किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है।

क्षेत्र में उभर रहा यह विरोध उस घटनाक्रम की याद भी दिला रहा है, जब कुछ दिन पूर्व आदिवासी समाज ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली से नाराज होकर जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट का घेराव किया था। उस समय भी शासन-प्रशासन के समक्ष संवादहीनता और स्थानीय भावनाओं की उपेक्षा जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए थे। अब खलारी में सामने आया जनप्रतिरोध यह दर्शाता है कि परिस्थितियों में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।

राजनीतिक और सामाजिक जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते संवाद स्थापित कर विवादित विषयों का समाधान नहीं किया गया तो ऐसी घटनाएं जिले में प्रशासन की छवि को और अधिक प्रभावित कर सकती हैं। लगातार विरोध प्रदर्शनों का सामने आना यह संकेत देता है कि आम नागरिकों और प्रशासन के बीच विश्वास का अंतर बढ़ रहा है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि उनका उद्देश्य व्यवस्था को बाधित करना नहीं, बल्कि अपनी बात जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाना है। उनका कहना है कि जब शिकायतों और मांगों पर उचित सुनवाई नहीं होती, तब जनता को लोकतांत्रिक तरीके से विरोध का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

फिलहाल खलारी में हुए चक्का जाम ने जिले की प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के लिए यह स्थिति एक गंभीर चेतावनी मानी जा रही है। यदि जनभावनाओं को समझने और संवाद कायम करने की दिशा में प्रभावी पहल नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में असंतोष का यह स्वर और व्यापक रूप ले सकता है।

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