हमर छत्तीसगढ़

खनिजों से मालामाल, व्यवस्था से बदहाल! करोड़ों की रॉयल्टी देने वाली दल्लीराजहरा नगर पालिका की बदहाल तस्वीर

नगर पालिका के कई हिस्सों में सार्वजनिक स्थलों पर लगाए गए प्लास्टर उखड़ चुके हैं। दीवारें अपनी बदहाली पर स्वयं सवाल खड़े करती नजर आती हैं।

 

संपादक :- मीनू साहू

संवाददाता :- बीरेंद्र साहू 

बालोद/दल्लीराजहरा: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले की दल्लीराजहरा नगर पालिका प्रदेश के उन क्षेत्रों में गिनी जाती है, जहां से खनिज रॉयल्टी के रूप में शासन को बड़ी आय प्राप्त होती है। लेकिन विडंबना यह है कि जिस नगर की धरती से करोड़ों रुपये का राजस्व निकलता है, उसी नगर की मूलभूत व्यवस्थाएं आज जर्जरता की कहानी बयां कर रही हैं।

नगर पालिका के कई हिस्सों में सार्वजनिक स्थलों पर लगाए गए प्लास्टर उखड़ चुके हैं। दीवारें अपनी बदहाली पर स्वयं सवाल खड़े करती नजर आती हैं। वर्षों पहले हुए निर्माण कार्य अब रखरखाव के अभाव में दम तोड़ते दिखाई दे रहे हैं। हालत इतनी दयनीय है कि कई स्थानों पर छत के पंखे लगाने के लिए लगाए गए हुक तक उखड़ चुके हैं। यह दृश्य केवल लापरवाही नहीं, बल्कि जिम्मेदार तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नगर पालिका को पर्याप्त संसाधन और आय उपलब्ध है, तब भी नागरिकों को सुरक्षित और व्यवस्थित आधारभूत सुविधाएं क्यों नहीं मिल पा रही हैं? क्या विकास केवल कागजों और बैठकों तक सीमित रह गया है? क्या रखरखाव की जिम्मेदारी केवल फाइलों में निभाई जा रही है?

नगरवासियों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत और संरक्षण कार्य किए जाते, तो आज सरकारी संपत्तियां इस तरह बर्बादी की कगार पर नहीं पहुंचतीं। करोड़ों रुपये की परिसंपत्तियां धीरे-धीरे खंडहर में बदलती जा रही हैं और जिम्मेदार विभाग मौन साधे बैठा है।

यह केवल टूटे हुए प्लास्टर या उखड़े हुए हुक का मामला नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक उदासीनता, निगरानी की कमजोरी और जवाबदेही के अभाव का प्रतीक बन चुका है। जिस नगर ने वर्षों तक प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दिया, वही नगर आज अपनी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करता दिखाई दे रहा है।

अब आवश्यकता केवल मरम्मत की नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने की है। आखिर करोड़ों की रॉयल्टी का लाभ नगर की जनता को कब मिलेगा? दल्लीराजहरा की बदहाल तस्वीर यह संदेश दे रही है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं संभली, तो विकास के दावे उखड़े हुए प्लास्टर की तरह धराशायी होते रहेंगे। जनता अब आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई और जवाब चाहती है।

Related Articles

Back to top button