हमर छत्तीसगढ़

“तुकाराम कोर्राम जिलाध्यक्ष सर्व आदिवासी समाज ने कहा कि पाटेश्वर सेवा संस्थान के आयोजन व मुख्यमंत्री कार्यक्रम का ग्रामीण कर रहे हैं विरोध प्रशासन है मौन”

“तुकाराम कोर्राम जिलाध्यक्ष सर्व आदिवासी समाज ने कहा कि पाटेश्वर सेवा संस्थान के आयोजन व मुख्यमंत्री कार्यक्रम का ग्रामीण कर रहे हैं विरोध प्रशासन है मौन”

“तुकाराम कोर्राम जिलाध्यक्ष सर्व आदिवासी समाज ने कहा कि पाटेश्वर सेवा संस्थान के आयोजन व मुख्यमंत्री कार्यक्रम का ग्रामीण कर रहे हैं विरोध प्रशासन है मौन”

बालोद:- सर्व आदिवासी समाज के जिलाध्यक्ष तुकाराम कोर्राम ने कहा कि छत्तीसगढ़ के बालोद ज़िले के ग्राम पंचायत तुमड़ीकसा के आश्रित ग्राम तुयेगोंदी के सीमा क्षेत्र में 07 अक्टूबर 2025 को पाटेश्वर सेवा संस्थान द्वारा आयोजित किए जा रहे शरद पूर्णिमा महोत्सव को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्राम सभा की स्पष्ट सहमति के बिना यह आयोजन तय किया गया है, जिससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि जब ग्राम सभा सर्वोच्च संस्था है, तो उसकी अनुमति के बिना किसी भी प्रकार का आयोजन पूरी तरह असंवैधानिक और गैरकानूनी माना जाएगा।इस महोत्सव में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव सहाय का आगमन प्रस्तावित है, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर तैयारियों में व्यस्त है, लेकिन स्थानीय जनता की आपत्तियों और विरोध को पूरी तरह अनसुना कर रहा है। ग्रामवासियों का मानना है कि इस तरह की उपेक्षा न केवल लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है बल्कि स्थानीय अधिकारों पर सीधा कुठाराघात भी है।ग्राम तुयेगोंदी के सदस्यों ने स्पष्ट कहा है कि वे किसी भी कीमत पर बिना उनकी सहमति के इस कार्यक्रम को सफल नहीं होने देंगे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी आवाज़ दबाने की कोशिश की गई तो वे शांतिपूर्ण आंदोलन से लेकर बड़े स्तर पर विरोध दर्ज कराएंगे।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस और प्रशासन की भूमिका अत्यंत पक्षपातपूर्ण रही है।जनभावनाओं को नज़रअंदाज़ करते हुए अधिकारी आयोजन समिति का संरक्षण कर रहे हैं।सबसे बड़ी चिंता यह है कि प्रशासन ने अब तक न तो ग्रामीणों के निर्णय का सम्मान किया है और न ही विरोध की आवाज़ को गंभीरता से लिया है। उल्टा पुलिस बल की व्यवस्था का इस्तेमाल कर जनता की आवाज़ को दबाने की तैयारी की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है और यदि उनकी राय को महत्व नहीं दिया जाएगा तो यह आने वाले समय में गहरे असंतोष और अविश्वास का कारण बनेगा।इस पूरे विवाद ने स्पष्ट कर दिया है कि ग्राम सभाओं की भूमिका को हाशिए पर डालने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों की चेतावनी और बढ़ते असंतोष के बीच प्रशासनिक लापरवाही तथा मुख्यमंत्री का संभावित आगमन—दोनों ही हालात को और विस्फोटक बना सकते हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन जनभावनाओं का सम्मान करता है या एक बार फिर जनता की आवाज़ को दबाने का प्रयास करता है।

Related Articles

Back to top button