मनीराम तारम अब बालोद में तैनात है ये जिम्मेदारी से भागा अधिकारी! सिविल सेवा नियमों की धाराओं का किया था खुला उल्लंघन

बालोद:- छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के अंतर्गत कोण्डागांव में तत्कालीन पदस्थ रहे मनीराम तारम की गंभीर लापरवाही, कर्तव्यहीनता और प्रशासनिक अनुशासनहीनता ने विभाग की विश्वसनीयता को गहरा आघात पहुँचाया है। जिस पद पर सुरक्षा, अनुशासन और नियमों का कठोर पालन सुनिश्चित करना उनका संवैधानिक एवं वैधानिक दायित्व था, उसी पद का दुरुपयोग करते हुए उन्होंने न केवल अपने फर्ज से मुँह मोड़ा, बल्कि दो ठेका कर्मचारियों को मौत के मुहाने पर धकेल दिया।3 जनवरी 2024 को कोण्डागांव के 33/11 केवी विद्युत उपकेन्द्र में लाइन मरम्मत कार्य के दौरान दो आउटसोर्सिंग कर्मी — बाईस राम एवं युवराज — विद्युत प्रवाह की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गए। हादसे के समय मनीराम तारम कार्यालय में मौजूद थे, लेकिन कार्यस्थल पर नहीं पहुँचे। यह उनकी लापरवाही का स्पष्ट प्रमाण है — न चूक, बल्कि जानबूझकर की गई कर्तव्यविमुखता।अधीनस्थ कर्मचारियों को सुरक्षा मानकों का पालन कराना, आवश्यक निर्देश देना और सुरक्षा उपकरणों की जाँच सुनिश्चित करना उनका दायित्व था। लेकिन उन्होंने न तो निगरानी की, न ही कार्य के दौरान मौजूद रहकर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया परिणामस्वरूप यह दुखद दुर्घटना हुई, जिसने कंपनी की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया।दुर्घटना के बाद भी उनकी उदासीनता जारी रही। कंपनी नियमों के अनुसार सात दिनों में विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य था, किंतु कई दिन बीत जाने के बावजूद उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी। यह न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही के प्रति पूर्ण उपेक्षा का प्रमाण है।
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के अंतर्गत उल्लंघित धाराएँ:
नियम 3(1):
“प्रत्येक सरकारी सेवक अपनी ड्यूटी के निर्वहन में पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करेगा।”
→ उल्लंघन: मनीराम तारम ने जानबूझकर कार्यस्थल पर अनुपस्थित रहकर और सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी कर कर्तव्य में घोर लापरवाही बरती।
नियम 3(2)(i):
“सरकारी सेवक अपने कर्तव्यों का निर्वहन कुशलता, सतर्कता और उत्तरदायित्व के साथ करेगा।”
→ उल्लंघन: सुरक्षा जाँच और निगरानी में पूर्ण असफलता, जिसके कारण दो कर्मचारियों की जान गई।
नियम 3(2)(ii):
“सरकारी सेवक अपने अधीनस्थों के कार्यों की उचित निगरानी और निर्देशन करेगा।”
→ उल्लंघन: अधीनस्थ ठेका कर्मचारियों को कोई सुरक्षा निर्देश नहीं दिए गए, न ही उपकरणों की जाँच हुई।
नियम 4:
“सरकारी सेवक अपने पद की गरिमा बनाए रखेगा और ऐसा कोई कार्य नहीं करेगा जो सरकार की प्रतिष्ठा को हानि पहुँचाए।”
→ उल्लंघन: घटना की रिपोर्ट में देरी और तथ्यों को दबाने का प्रयास, जिससे विभाग की विश्वसनीयता पर सवाल उठे।
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के अंतर्गत दंडनीय अपराध:
नियम 10 (कुशलता की कमी एवं कर्तव्य में लापरवाही):
→ प्रमुख दंड (Major Penalty) के अंतर्गत आता है, जिसमें पदावनति, वेतन वृद्धि रोकना या बर्खास्तगी शामिल है।
नियम 14 (प्रमुख दंड प्रक्रिया):
→ इस मामले में विभागीय जाँच अनिवार्य है, जिसमें चार्जशीट जारी कर अधिकारी को निलंबित किया जा सकता है।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अंतर्गत इस प्रकार की लापरवाही से हुई मौत के मामले में पुलिस तत्काल दंड प्रक्रिया संहिता (BNCrPC), 2023 के तहत कार्यवाही शुरू कर सकती है, जो विद्युत दुर्घटना को संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) मानती है।
सामाजिक कार्यकर्ता मोहन निषाद ने कहा कि
विद्युत अधिनियम, 2003 धारा 161 के तहत
“विद्युत दुर्घटना से मौत या चोट पर विभाग उत्तरदायी होगा, जिसमें पीड़ित परिवार को मुआवजा देना शामिल है लापरवाही सिद्ध होने पर आपराधिक कार्यवाही।”विभाग को तत्काल मुआवजा देना होगा, तथा दोषी अधिकारी पर BNS के साथ संयुक्त कार्यवाही।केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) सुरक्षा विनियम, 2010 (Electricity Act के तहत अधिसूचित) ये विनियम विद्युत कार्यों में PPE (सुरक्षा उपकरण) एवं निगरानी अनिवार्य करते हैं। उल्लंघन पर विभागीय दंड, जिसमें निलंबन या बर्खास्तगी है वर्तमान में मनीराम तारम छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में पदस्थ हैं। उनकी यह निष्क्रियता, लापरवाही और अनुशासनहीनता छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 की धारा 3 एवं वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील नियम 1966 की धारा 10, BNS धारा 106, BNCrPC धारा 173/194 तथा विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 153/161 के तहत गंभीर दंडनीय अपराध की श्रेणी में आती है। मनी राम अब विभाग की गरिमा पर एक स्थायी कलंक बन चुके हैं — जिनकी निष्क्रियता ने न केवल मानवीय संवेदनाओं को ठेस पहुँचाई, बल्कि सरकारी जिम्मेदारी की मूल भावना को भी क्षत-विक्षत कर दिया।



