हमर छत्तीसगढ़

बालोद कलेक्टर का रातों-रात सड़क निरीक्षण या पसीने की बौछार?

बालोद:- छत्तीसगढ़ में बालोद जिला के निवासी सामाजिक कार्यकर्ता मोहन निषाद ने कहा कि जिला मुख्यालय में सड़कें कीचड़ धूल मिट्टी और गड्ढों में तब्दील हो गया है समझ नहीं आता कि पथ खाई में है की गर्त में लोकमार्ग नागरिकों की चीख-पुकार अनसुनी हो रही थी, लेकिन अचानक कलेक्टर महोदय को देर शाम ‘निरीक्षण’ का ख्याल आया। दल्ली चौक से मधु चौक तक निर्माणाधीन मार्ग का जायजा लेते हुए उन्होंने दिशानिर्देश दिए, मानो कोई बड़ा प्रदर्शन हो। जिला पंचायत सीईओ एसडीएम और लोक निर्माण विभाग व नगर पालिका के अफसरों की फौज भी साथ थी।ये वही अफसर हैं जो महीनों से जनता की शिकायतों पर कुंडली मारकर सोए हुए थे।सवाल उठता है अचानक क्या हो गया? सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने बार-बार सड़क की बदहाली, धूल-कीचड़ से होने वाली बीमारियां, निर्माण व मवेशियों के कारण वाहनों के फंसने और दुर्घटनाओं पर ध्यानाकर्षण कराया था कई बार गुहार लगाए थे। लेकिन जिला प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी थी। अब रात के अंधेरे में कलेक्टर साहब उतरे तो उनके माथे से ठंडी शाम में भी पसीना छूटने लगा। क्यों? क्योंकि जमीन पर उतरकर देखा तो हकीकत का कड़वा घूंट गटकना पड़ा। बंद कमरे के एसी की ठंडक में योजनाएं बनाना आसान है, लेकिन जनता की रोजमर्रा तकलीफें – बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल, बुजुर्गों का अस्पताल पहुंचना जोखिम, दुकानदारों का कारोबार ठप – ये सब देखकर शायद सबसे बड़े अफसर को भी एहसास हो गया कि उनकी ‘विकास’ की पोल खुल रही है। कई दिनों से बंद पड़ी सड़कों की मरम्मत का जायजा लेने पहुंचे अफसरों ने क्या किया? कुछ नहीं! नगरवासियों की प्यास तक नहीं बुझा पाए, पानी की सप्लाई बाधित, लेकिन ‘विकास’ के नाम पर सिर्फ बहाने। लोक निर्माण और नगर पालिका के कर्मचारी तो मानो छुट्टी पर हैं। जिला प्रशासन की नाकामी साफ झलकती है – करोड़ों की योजनाएं कागजों पर, लेकिन सड़कें गड्ढों में तब्दील है। नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा है। “बार-बार शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई अब ये ड्रामा शुरू?”यह निरीक्षण कोई सच्ची चिंता नहीं, बल्कि ढोंग है। जनता भुगत रही है, अफसर मौज कर रहे हैं। बालोद की रोडे बदहाली की मिसाल बन गई हैं, और प्रशासन की सुस्ती पर सवालिया निशान। कब तक ऐसे नाटक चलेंगे? जनता अब जाग चुकी है, अगला कदम क्या होगा – यह देखने वाली बात है।

Related Articles

Back to top button