छत्तीसगढ़ में “कानून की नींद और ठगों का तांडव”

बालोद:- छत्तीसगढ़ के जिला बालोद की शांत धरती पर आज कानून की नींद का नंगा प्रदर्शन हो रहा है। जिस राज्य में योग सिखाने वाला व्यक्ति डर के साए में जीने लगे, वहाँ यह कहना पड़ेगा कि खाकी सिर्फ रंग नहीं, बेबसी का प्रतीक बन चुकी है। दीनदयाल जेठूमल नाम के व्यक्ति के साथ जो हुआ, वह किसी एक की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। एक व्यक्ति की 81 लाख की संपत्ति को झूठे सौदों और बाउंस चेकों के जरिये छीन लिया गया। यह केवल ठगी नहीं, बल्कि कानून के दरवाजे पर थूका गया एक तमाचा है।दीनदयाल ने जमीन का सौदा इसलिए किया क्योंकि सामने वाले ने खुद को ईमानदार बताया, पर कुछ ही दिनों में सब स्पष्ट हो गया कि यह सौदा नहीं, साजिश थी। पहले एक लाख का बयाना, फिर छह लाख का चेक और अंततः 74 लाख के फर्जी चेक। उसके बाद दबाव, धमकी और झूठी रजिस्ट्री। जब उन्होंने विरोध किया तो ठगों का गिरोह उन पर टूट पड़ा — धमकियों, झूठे केसों और पुलिस की चुप्पी ने उन्हें घेर लिया।अब खुलेआम कहा जा रहा है, “केस वापस लो वरना झूठी रेप FIR ठोंककर तबाह कर देंगे।” ऐसी भाषा में केवल अपराधी ही नहीं बोलते, ऐसी भाषा तभी चलती है जब उन्हें विश्वास हो कि पुलिस उनकी जेब में है। तारा साहू नामक महिला को आगे कर बलात्कार का झूठा केस बनाना इस गिरोह की सबसे खतरनाक चाल थी। सीसीटीवी फुटेज में दीनदयाल पूरे दिन अपने आश्रम में दिख रहे हैं, लेकिन पुलिस अब तक यह कहने की हिम्मत नहीं जुटा सकी कि शिकायत फर्जी है।फरार ठग गाँव में टहलते हैं, पुलिस बयान देती है — “तीन गिरफ्तार हो चुके हैं।” यही जवाब पुलिस के हर अधिकारी नागरिक को दे रहे है। जनता सवाल पूछ रही है — क्या कानून का डर अब खत्म हो गया? क्या पुलिस अब सिर्फ रिपोर्ट टाइप करने की मशीन बन चुकी है?यदि शासन ने अभी आँखें नहीं खोलीं तो यह मामला किसी दिन सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं रहेगा, यह कानून पर जनता के अविश्वास का प्रतीक बन जाएगा। बालोद को इंसाफ चाहिए, और इंसाफ सिर्फ गिरफ्तारी से नहीं, बल्कि साहसिक, निष्पक्ष कार्रवाई से मिलेगा।



