मिनी भट्टी का साया निपानी गांव में कथित अवैध शराब के आरोपों से त्रस्त ग्रामीण, बच्चों के भविष्य पर मंडराता खतरा

रिपोर्टर:- उत्तम साहू
बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले अंतर्गत ग्राम निपानी, थाना बालोद क्षेत्र में एक घर को लेकर लंबे समय से गंभीर चर्चाएँ चल रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अज्जू बंजारे, पिता बसंत बंजारे के निवास स्थान में दुकान है उनको वे “मिनी भट्टी” के नाम से जानते हैं। गांववासियों के अनुसार, यहां से कथित तौर पर अवैध शराब की बिक्री होती है, जिससे सामाजिक माहौल बिगड़ रहा है और आमजन का जीवन प्रभावित हो रहा है। हालांकि, यह बातें ग्रामीणों के आरोप और अनुभव पर आधारित हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच की मांग लगातार उठ रही है।स्थानीय लोगों का कहना है कि इस कथित गतिविधि के कारण गांव की शांति भंग हो रही है। शाम ढलते ही असामाजिक तत्वों की आवाजाही बढ़ जाती है, जिससे महिलाओं और बुजुर्गों में असुरक्षा की भावना गहराने लगती है। ग्रामीणों के अनुसार, शराब के नशे में झगड़े, गाली-गलौज और सड़क पर हंगामा अब आम दृश्य बनते जा रहे हैं। इससे गांव की साख पर भी प्रश्नचिह्न लग रहा है।सबसे गंभीर चिंता बच्चों और युवाओं को लेकर सामने आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि नाबालिगों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। बच्चे रोज़ अपने आसपास नशे का दृश्य देखते हैं, जिससे उनके मन पर गलत संदेश जा रहा है। पढ़ाई-लिखाई से ध्यान हटना, अनुशासन में कमी और गलत संगत की आशंका जैसे खतरे गांव के भविष्य को खोखला कर सकते हैं। अभिभावकों का कहना है कि वे बच्चों को समझाने की कोशिश करते हैं, लेकिन जब माहौल ही दूषित हो तो प्रयास कमजोर पड़ जाते हैं।ग्रामीण यह भी आरोप लगाते हैं कि कथित दुकान से बिक्री बेधड़क होती है, मानो किसी नियम-कानून का भय न हो। उनका कहना है कि कई बार शिकायतें मौखिक रूप से की गईं, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने से लोगों में निराशा बढ़ी है। गांव के जिम्मेदार नागरिकों का मानना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।ग्रामवासियों की एकजुट मांग है कि प्रशासन और पुलिस इस मामले की निष्पक्ष जांच करें। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो नियमों के अनुसार कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि गांव में कानून का भरोसा कायम हो सके। साथ ही, नशामुक्ति अभियान, जनजागरूकता कार्यक्रम और युवाओं के लिए सकारात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने की जरूरत बताई जा रही है।निपानी के लोग चाहते हैं कि उनका गांव शांति, संस्कार और सुरक्षित भविष्य की पहचान बने—न कि कथित “मिनी भट्टी” जैसी चर्चाओं का केंद्र। अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह ग्रामीणों की पीड़ा सुने, तथ्यों की जांच करे और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए निर्णायक कदम उठाए।



