वर्दी की छांव में फलता गांजा साम्राज्य अरकार का दिलीप कोसरे बना नशे का सरगना

संवाददाता:- उत्तम साहू
बालोद/पलारी :- छत्तीसगढ़ में नशामुक्ति के सरकारी दावे मंचों और फाइलों तक सिमटकर रह गए हैं, जबकि जमीनी सच्चाई इससे ठीक उलट है। क्षेत्र में अवैध गांजा कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण ग्राम अरकार निवासी दिलीप कोसरे पिता चन्द्रकुमार कोसरे है, जो अब केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि अंतर्राज्यीय गांजा तस्कर बनने की दिशा में निर्भीक कदम बढ़ा चुका है। यह निर्भीकता यूं ही नहीं आई, इसके पीछे कथित पुलिस संरक्षण और विभागीय आंख-मिचौली की गहरी परतें हैं।
दिलीप कोसरे जैसे नामी होलसेल गांजा कारोबारी का नेटवर्क इतना मजबूत हो चुका है कि वह खुलेआम कहता फिरता है कि “उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।” दिनदहाड़े अन्य राज्यों से गांजा मंगवाना, मजदूरों के माध्यम से सप्लाई कराना और चेक प्वाइंट्स पर बिना जांच के वाहन निकाल लेना—यह सब अपने आप में बहुत कुछ बयान करता है। सवाल यह है कि जब आम नागरिक की गाड़ी तक रोकी जाती है, तो फिर गांजा लदी गाड़ियां कैसे बेधड़क निकल जाती हैं?क्षेत्रीय पुलिस की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। दिलीप कोसरे जैसे बड़े तस्कर पर हाथ डालने के बजाय छोटे-मोटे कारोबारियों पर कार्रवाई कर वाहवाही लूटी जाती है। इतना ही नहीं, जो ग्रामीण या जागरूक नागरिक इस अवैध धंधे की शिकायत करते हैं, उन्हें ही कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर चुप करा दिया जाता है। तबादले होते रहे, अधिकारी बदलते रहे, लेकिन दिलीप कोसरे का अवैध साम्राज्य जस का तस खड़ा है—यह अपने आप में सिस्टम की पोल खोलने के लिए काफी है।इस गांजा कारोबार का सबसे भयानक दुष्परिणाम गांव और आसपास के समाज पर पड़ रहा है। स्कूली बच्चे, युवा, अधेड़ और बुजुर्ग—हर वर्ग नशे की चपेट में है। घर-घर कलह, आर्थिक तबाही, मानसिक और शारीरिक हिंसा आम हो चुकी है। नशे की पूर्ति के लिए चोरी, छिनतई, लूटपाट और मारपीट की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। महिलाएं और बेटियां असुरक्षा के साये में जीने को मजबूर हैं, खेत-खलिहान तक जाना भी भय का कारण बन गया है।
अरकार में दिलीप कोसरे के ठिकानों पर दिन-रात नशेड़ियों की भीड़ लगी रहती है। चौक-चौराहों पर झुंड के झुंड गांजा और हुक्का पीते लोग सामाजिक मर्यादाओं को तार-तार कर रहे हैं। अश्लील गाली-गलौच, आपसी झगड़े और हिंसा ने पूरे क्षेत्र को बदनाम कर दिया है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि अभिभावक अपनी बेटियों और बहुओं के रिश्ते इस क्षेत्र में करने से हिचक रहे हैं।ग्रामीण प्रतिनिधियों का साफ कहना है कि अवैध गांजा बिक्री ने गांव के विकास को जकड़ लिया है। समझाने पर विवाद होता है और शिकायतें महज औपचारिकता बनकर रह जाती हैं। नारकोटिक्स, आबकारी और पुलिस की निष्क्रियता ने दिलीप कोसरे जैसे तस्करों के हौसले बुलंद कर दिए हैं।अब सवाल सिर्फ एक गांजा तस्कर का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही का है। अगर समय रहते कठोर, निष्पक्ष और ईमानदार कार्रवाई नहीं हुई, तो अरकार से उठा यह नशे का ज़हर पूरे क्षेत्र और सीमाओं के पार तक समाज को खोखला करता चला जाएगा।



