आरटीआई जवाब पर उठे सवाल, असवन साहू ने दी जानकारी — राजेश घोड़ेसवार की भूमिका पर भी चर्चा तेज
आरटीआई प्रकरण में बढ़ा विवाद, सूचना उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर उठे नए प्रश्न

संपादक:- मीनू साहू
बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में शिक्षा विभाग से जुड़े एक सूचना अधिकार प्रकरण ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। सूचना के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत मांगी गई जानकारी के संदर्भ में विभागीय उत्तर पर असवन साहू ने गंभीर आपत्तियां दर्ज कराते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दों को सार्वजनिक किया है। उनका कहना है कि आवेदन में जिन विषयों पर स्पष्ट अभिलेखीय विवरण मांगा गया था, उन बिंदुओं का समुचित निराकरण विभागीय जवाब में दिखाई नहीं देता।
जानकारी के अनुसार आवेदन के माध्यम से विभाग द्वारा अपनाई गई क्रय एवं निविदा प्रक्रिया, जेम (GeM) पोर्टल के उपयोग की स्थिति, निविदा आमंत्रण के प्रकाशन संबंधी रिकॉर्ड, प्रक्रिया में शामिल एजेंसियों की संख्या तथा संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। किंतु प्राप्त उत्तर में मुख्यतः विद्यालयवार विवरण, स्वीकृत राशि तथा व्यय संबंधी आंकड़े प्रस्तुत किए गए। इससे यह प्रश्न उभरने लगा है कि आवेदन में उल्लिखित प्रमुख विषयों से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने में आखिर किस प्रकार की बाधा रही।
असवन साहू का आरोप है कि सूचना अधिकार कानून का उद्देश्य केवल औपचारिक जवाब देना नहीं, बल्कि प्रशासनिक निर्णयों को जनसामान्य के समक्ष पारदर्शी बनाना है। यदि आवेदनकर्ता द्वारा मांगे गए विशिष्ट तथ्यों का प्रत्यक्ष उत्तर नहीं दिया जाता, तो इससे शंकाएं और गहरी होती हैं। उन्होंने संपूर्ण मामले की निष्पक्ष समीक्षा कर आवश्यक दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग दोहराई है।
इधर इस प्रकरण में राजेश घोड़ेसवार द्वारा साझा की गई सूचनाओं एवं प्रस्तुत दस्तावेजों को लेकर भी चर्चा का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। विभिन्न सामाजिक एवं प्रशासनिक हलकों में यह सवाल उठाया जा रहा है कि मामले के जिन पहलुओं को सामने रखा गया, क्या उनमें सभी आवश्यक तथ्यों का समुचित समावेश किया गया था अथवा नहीं। हालांकि उपलब्ध सामग्री के आधार पर किसी भी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम टिप्पणी करना जल्दबाजी माना जा रहा है, क्योंकि निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए आधिकारिक अभिलेखों का गहन परीक्षण आवश्यक होगा।
वर्तमान परिस्थिति में सबसे प्रमुख मांग यही उभरकर सामने आ रही है कि आरटीआई आवेदन में पूछे गए प्रत्येक प्रश्न का बिंदुवार, प्रमाणिक तथा रिकॉर्ड आधारित उत्तर सार्वजनिक किया जाए। नागरिकों का मानना है कि प्रशासनिक जवाबदेही और सुशासन की मजबूती के लिए सूचना का पूर्ण प्रकटीकरण आवश्यक है। अब लोगों की निगाहें विभाग की आगामी कार्रवाई और संभावित स्पष्टीकरण पर टिकी हुई हैं, जिससे पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।



