हमर छत्तीसगढ़

53 पेटी शराब की बरामदगी से बालोद आबकारी विभाग पर गहराया संदेह! निगरानी तंत्र की नाकामी पर उठे तीखे सवाल

कारण बताओ नोटिस ने बढ़ाई हलचल, आखिर इतनी बड़ी खेप विभागीय निगाहों से कैसे बचती रही?

 

संपादक:- मीनू साहू 

बालोद। धमतरी पुलिस द्वारा 53 पेटी शराब जब्त किए जाने के बाद बालोद जिले का आबकारी अमला सवालों के घेरे में आ गया है। मामले में जिला आबकारी अधिकारी द्वारा संबंधित आबकारी उपनिरीक्षक को जारी कारण बताओ नोटिस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रथम दृष्टया विभागीय निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि निरीक्षण, पर्यवेक्षण और गश्त की व्यवस्था नियमित रूप से संचालित हो रही थी, तो इतनी बड़ी मात्रा में शराब अपने मूल स्रोत से बाहर कैसे पहुंच गई?जारी दस्तावेज़ के अनुसार, 25 जुलाई 2026 को धमतरी पुलिस ने 53 पेटी शराब जब्त की। प्रारंभिक जांच में यह पाई गई कि जब्त शराब का संबंध गुरुर वृत्त क्षेत्र के अंतर्गत संचालित एक देशी कम्पोजिट मदिरा दुकान अर कार से था । इसके बाद संबंधित आबकारी उपनिरीक्षक को तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया। नोटिस में कर्तव्यों के निर्वहन, पर्यवेक्षण तथा नियंत्रण में लापरवाही का उल्लेख भी किया गया है, जिससे पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।

क्या निगरानी व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित थी?

इतनी बड़ी बरामदगी ने आबकारी विभाग की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि नियमित निरीक्षण, स्टॉक सत्यापन और क्षेत्रीय निगरानी प्रभावी होती, तो क्या इतनी बड़ी मात्रा में शराब कथित रूप से अवैध रूप से बाहर निकल पाती? अब चर्चा केवल एक अधिकारी की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि पूरे निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।लोग यह भी जानना चाहते हैं कि विभाग की ओर से समय-समय पर किए जाने वाले निरीक्षणों का वास्तविक प्रभाव क्या था। यदि क्षेत्र में अवैध गतिविधियों की आशंका थी, तो उन्हें रोकने के लिए कौन-से कदम उठाए गए और वे कितने प्रभावी साबित हुए?

भाजपा नेता दुर्गानंद साहू ने लगाए गंभीर आरोप

गुरुर जनपद उपाध्यक्ष एवं भाजपा नेता दुर्गानंद साहू ने आरोप लगाया कि क्षेत्र के कई होटलों और ढाबों में लंबे समय से अवैध शराब बिक्री की शिकायतें सामने आती रही हैं। उनका दावा है कि संबंधित अधिकारी के कार्यकाल के दौरान इस तरह की गतिविधियों को लेकर लगातार शिकायतें होती रहीं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।साहू ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि केवल स्थानांतरण से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि दोष तय होने पर विभागीय स्तर पर सेवा समाप्त जैसे कड़ी कार्रवाई आवश्यक है। साथ ही पूरे आबकारी तंत्र की कार्यप्रणाली की व्यापक समीक्षा कराने की भी मांग की।

अब जवाबदेही तय होने का इंतजार

53 पेटी शराब की बरामदगी के बाद आम लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या विभागीय निगरानी व्यवस्था वास्तव में प्रभावी थी या फिर केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित रह गई थी। यदि अवैध शराब की आवाजाही लंबे समय तक होती रही, तो क्या संबंधित अधिकारियों तक इसकी जानकारी नहीं पहुंची, या फिर निगरानी प्रणाली में ऐसी कमियां थीं जिनका फायदा उठाया गया?कारण बताओ नोटिस ने यह संकेत जरूर दिया है कि विभाग स्वयं भी प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मान रहा है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

पूरे मामले पर टिकी हैं जनता की निगाहें

यह मामला अब केवल एक नोटिस या एक अधिकारी तक सीमित नहीं रह गया है। सवाल पूरे जिला आबकारी विभाग की जवाबदेही, निरीक्षण प्रणाली और नियंत्रण व्यवस्था पर उठ रहे हैं। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच कितनी निष्पक्ष, पारदर्शी और व्यापक होती है तथा क्या वास्तविक जिम्मेदारी तय कर प्रभावी कार्रवाई की जाती है।यदि जांच निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर पूरी होती है, तो इससे न केवल इस प्रकरण की सच्चाई सामने आएगी बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने का अवसर मिलेगा। वहीं यदि जांच केवल औपचारिकता बनकर रह गई, तो विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल और भी गहरे हो सकते हैं।

Related Articles

Back to top button