सिकोसा में कथित अवैध शराब तंत्र पर गहराए सवाल! आखिर किसकी छत्रछाया में चल रहा यह संदिग्ध कारोबार?
सुबह से बाजार क्षेत्र में संदिग्ध हलचल की चर्चा, ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की उठाई मांग पुलिस व आबकारी विभाग की सक्रियता पर उठे प्रश्न

संपादक:- मीनू साहू
सिकोसा/बालोद :- बालोद जिले के गुण्डरदेही थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत सिकोसा एक बार फिर कथित अवैध शराब कारोबार को लेकर चर्चा में है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के बस स्टैंड, बाजार चौक और अन्य स्थानों पर लंबे समय से अवैध शराब की बिक्री होने की बातें सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि सुबह करीब पांच बजे से ही कुछ स्थानों पर संदिग्ध गतिविधियां शुरू हो जाती हैं और वहां बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही देखी जाती है। इन दावों ने केवल कानून-व्यवस्था ही नहीं, बल्कि निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव के सार्वजनिक स्थानों पर इस प्रकार की गतिविधियां लगातार संचालित होने के आरोप लग रहे हैं, तो संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है, यह स्वयं एक बड़ा प्रश्न बन गया है। लोगों का कहना है कि जब आम नागरिक इन घटनाओं को महसूस कर रहे हैं, तब जिम्मेदार एजेंसियों तक इसकी जानकारी नहीं पहुंचना कई तरह की आशंकाओं को जन्म देता है। यही कारण है कि अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज होती जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कथित अवैध शराब बिक्री का प्रतिकूल प्रभाव गांव के सामाजिक माहौल पर पड़ रहा है। विशेष रूप से युवाओं और दैनिक मजदूरी करने वाले लोगों के प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो स्थिति और अधिक चिंताजनक रूप ले सकती है। उनका मानना है कि ऐसे मामलों में केवल औपचारिक निरीक्षण पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर वास्तविक जांच आवश्यक है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित क्षेत्रों में नियमित गश्त और निगरानी की व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू की जा रही है? क्या स्थानीय स्तर पर मिली शिकायतों का सत्यापन हुआ है? यदि शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं तो कार्रवाई में विलंब का कारण क्या है? इन सभी बिंदुओं पर प्रशासन से स्पष्ट जवाब की अपेक्षा की जा रही है।
प्रशासन के सामने कई अहम प्रश्न
ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोपों में सच्चाई मिलती है तो दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि क्या पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का परीक्षण करेगी तथा जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करेगी। लोगों का कहना है कि पारदर्शिता ही जनविश्वास बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
कानून का प्रभावी पालन कराना प्रशासन की मूल जिम्मेदारी है। यदि किसी क्षेत्र से लगातार अवैध गतिविधियों की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं तो उनका गंभीरता से परीक्षण किया जाना आवश्यक है। शिकायतें सही हों या गलत, दोनों ही परिस्थितियों में तथ्य सामने लाना प्रशासन की जवाबदेही का हिस्सा है। इससे अफवाहों पर विराम लगेगा और जनता को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सकेगी।
सिकोसा के नागरिक अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं दिख रहे। उनका कहना है कि यदि आरोप निराधार हैं तो प्रशासन स्पष्ट रूप से इसका तथ्यात्मक खंडन करे, और यदि शिकायतें सही साबित होती हैं तो केवल आरोपियों पर ही नहीं, बल्कि लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए। निष्पक्ष जांच, समयबद्ध कार्रवाई और पारदर्शी प्रक्रिया ही जनता के भरोसे को मजबूत कर सकती है।
अब पूरे मामले पर जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और आबकारी विभाग की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित एजेंसियां इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर कानून के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित करती हैं या फिर उठते सवालों के बीच जनता जवाब की प्रतीक्षा करती रहेगी।



