हमर छत्तीसगढ़

धमकी, हिंसा, दबाव, मुकदमों और डिजिटल उत्पीड़न से लेकर स्वास्थ्य, पेंशन व परिवार की चिंता तक

पत्रकारों के लिए व्यापक वैधानिक व्यवस्था की मांग

संपादक:- मीनू साहू

पत्रकार सुरक्षा आयोग की मांग तेज 25 सूत्रीय प्रस्ताव में सुरक्षा से सामाजिक संरक्षण तक उठे सवाल

रायपुर। पत्रकारों की सुरक्षा, स्वतंत्रता और सामाजिक-आर्थिक हितों को लेकर शिवशंकर सिंह ने केंद्र एवं राज्य सरकार के समक्ष “पत्रकार सुरक्षा, संरक्षण एवं कल्याण आयोग” गठित करने तथा “पत्रकार सुरक्षा, संरक्षण एवं कल्याण अधिनियम, 2026” बनाने का प्रस्ताव रखा है। 25 सूत्रीय मांग-पत्र में समाचार संकलन से लेकर व्यक्तिगत और पारिवारिक सुरक्षा तक पत्रकारों के सामने आने वाली विभिन्न चुनौतियों को शामिल किया गया है।प्रस्ताव में कहा गया है कि जनहित से जुड़े संवेदनशील विषयों पर रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों को धमकी, शारीरिक हमले, दबाव, डराने-धमकाने, डिजिटल ट्रोलिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न, मानहानि के दावों और कानूनी मामलों जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में त्वरित शिकायत व्यवस्था, सुरक्षा सहायता और विधिक संरक्षण उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

हिंसा और कानूनी कार्रवाई के मामलों में विशेष व्यवस्था

मांग-पत्र में पत्रकारों के साथ हिंसा अथवा धमकी की शिकायतों के लिए विशेष जांच व्यवस्था, 24 घंटे उपलब्ध सुरक्षा हेल्पलाइन तथा जिला स्तर पर पत्रकार सुरक्षा समितियां बनाने का सुझाव दिया गया है। पत्रकारों के विरुद्ध दर्ज कथित झूठे या दुर्भावनापूर्ण मुकदमों की समीक्षा, गिरफ्तारी और पूछताछ में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन तथा आवश्यकता पड़ने पर नि:शुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की बात भी रखी गई है।

परिवार, स्वास्थ्य और भविष्य की सुरक्षा पर भी जोर

25 बिंदुओं में पत्रकारों के परिवारों के लिए कल्याण योजना, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सहायता, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा को शामिल किया गया है। महिला पत्रकारों के लिए विशेष सुरक्षा प्रावधान तथा काम के दौरान कैमरा, मोबाइल, रिकॉर्डिंग उपकरण, दस्तावेज और अन्य सामग्री की सुरक्षा की व्यवस्था प्रस्तावित है।साथ ही सरकारी आयोजनों में समान एवं निष्पक्ष प्रवेश, सूचना तक वैधानिक पहुंच, छोटे और स्वतंत्र मीडिया संस्थानों को सहयोग तथा प्रेस एवं मीडिया कर्मियों के श्रम अधिकारों के संरक्षण की मांग उठाई गई है।

स्वतंत्र आयोग को जांच और अनुशंसा का अधिकार

प्रस्ताव में ऐसा स्वतंत्र आयोग बनाने की परिकल्पना की गई है, जो पत्रकारों से संबंधित सुरक्षा शिकायतों की जांच कर आवश्यक अनुशंसा कर सके। आयोग की पारदर्शिता, स्वायत्तता और जवाबदेही तय करने के साथ पत्रकार सुरक्षा की स्थिति पर वार्षिक रिपोर्ट जारी करने का सुझाव भी दिया गया है।मांग-पत्र में संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(a), 19(2), 21, 32, 226 तथा 38, 39, 41 और 43 का हवाला देते हुए समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, जीवन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, संवैधानिक उपचार और सामाजिक-श्रमिक कल्याण से जुड़े पहलुओं को आधार बनाया गया है।शिवशंकर सिंह ने सरकार से प्रस्तावित “पत्रकार सुरक्षा, संरक्षण एवं कल्याण अधिनियम, 2026” को विधायी रूप देने की मांग करते हुए कहा है कि पत्रकारों के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत करने से जुड़ा विषय है। प्रस्ताव का संदेश है—“सुरक्षित पत्रकारिता • सशक्त लोकतंत्र • जागरूक समाज।”

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