हमर छत्तीसगढ़

नगर पालिका में कमीशनखोरी के आरोप से मचा बवाल, अध्यक्ष के घर के सामने धरने पर बैठे उपाध्यक्ष मनोज दुबे

लौह नगरी की कमाई, बदहाली में तब्दील!

संपादक:- मीनू साहू 

जिस दल्ली राजहरा की खदानों से बालोद जिले को राजस्व मिलता है, उसी शहर की बदहाल तस्वीर पर अब सत्ता पक्ष के भीतर से उठी आवाज—उपाध्यक्ष ने संगठनात्मक हस्तक्षेप और कामकाज की व्यवस्था पर लगाए गंभीर आरोप

बालोद/दल्ली राजहरा :- बालोद जिले की आर्थिक पहचान में अहम स्थान रखने वाली दल्ली राजहरा की लौह खदानों से निकलने वाला खनिज भले ही अर्थव्यवस्था को मजबूती देता हो, लेकिन खदानों की नगरी की सड़कों, नागरिक सुविधाओं और नगर व्यवस्था की हालत पर सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं। अब यह असंतोष विपक्ष की आवाज भर नहीं रह गया है। नगर पालिका के उपाध्यक्ष मनोज दुबे के अध्यक्ष के घर के सामने धरने पर बैठने की घटना ने नगर की सियासत और पालिका प्रशासन के भीतर चल रही खींचतान को सार्वजनिक मंच पर ला खड़ा किया है।

मनोज दुबे के अनुसार नगर पालिका के कामकाज में एक राजनीतिक संगठन से जुड़े व्यक्ति का जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप हो रहा है। उनका आरोप है कि विकास कार्यों और दूसरे पालिका संबंधी मामलों में अनावश्यक दखल के पीछे कमीशन की मांग और आर्थिक हितों का दबाव काम कर रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है, लेकिन उपाध्यक्ष जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह का सार्वजनिक विरोध नगर की व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि नगर पालिका में निर्वाचित अध्यक्ष और उपाध्यक्ष मौजूद हैं, परिषद में पार्षद हैं और प्रशासनिक अधिकारी जिम्मेदार हैं, तो फिर बाहरी राजनीतिक हस्तक्षेप की जरूरत क्यों पड़ रही है? यदि मनोज दुबे के आरोप गलत हैं तो संबंधित पक्ष सामने आकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता? और यदि आरोपों में तथ्य है तो फिर जांच की प्रक्रिया अब तक सार्वजनिक रूप से क्यों दिखाई नहीं देती?

दल्ली राजहरा की जनता के सामने यह मामला केवल दो जनप्रतिनिधियों के बीच का विवाद नहीं है। यह उस व्यवस्था का प्रश्न है जिसमें शहर के विकास के लिए आने वाला पैसा किस प्राथमिकता से खर्च हो रहा है, निर्णय कौन ले रहा है और काम की गुणवत्ता की निगरानी कौन कर रहा है।

मनोज दुबे का धरना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वे स्वयं भाजपा समर्थित नगर पालिका व्यवस्था का हिस्सा हैं और 2025 में भाजपा पार्षद के रूप में उपाध्यक्ष चुने गए थे। उस समय उन्होंने शहर के विकास में अपनी भूमिका निभाने की बात कही थी। अब उसी व्यवस्था के भीतर से उठी नाराजगी ने भाजपा संगठन और नगर पालिका के बीच तालमेल पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने नगर की राजनीति को असहज कर दिया है। एक ओर विकास और सुशासन के दावे हैं, दूसरी ओर निर्वाचित उपाध्यक्ष को अध्यक्ष के घर के सामने धरने पर बैठना पड़ रहा है। यह दृश्य अपने आप में बताता है कि पालिका के भीतर संवाद की स्थिति कितनी कमजोर हो चुकी है।

दल्ली राजहरा को केवल खदानों से राजस्व देने वाला शहर मानकर छोड़ देना अब पर्याप्त नहीं होगा। यहां की जनता को सड़क, पानी, सफाई, प्रकाश, नाली और दूसरी बुनियादी सुविधाओं में ठोस सुधार चाहिए। हाल की रिपोर्टों में भी नगर की मूलभूत समस्याओं और विकास को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

अब निगाहें प्रशासन और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों पर हैं। मनोज दुबे द्वारा लगाए गए कमीशन और हस्तक्षेप के आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है या मामला राजनीतिक बयानबाजी बनकर रह जाता है—यह आने वाला समय तय करेगा। लेकिन इतना स्पष्ट है कि लौह नगरी की जनता अब आरोप-प्रत्यारोप नहीं, जवाब और जमीन पर दिखाई देने वाला विकास चाहती है।

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