हमर छत्तीसगढ़

PV ऐप से गिरदावरी या पटवारियों पर डिजिटल दबाव?

बालोद में 10 सवालों ने खोली व्यवस्था की परतें

संपादक:- मीनू साहू

अंतिम समय में नई प्रक्रिया लागू करने पर विरोध, खेत से मोबाइल स्क्रीन तक पहुंची गिरदावरी अब सवाल—ऐप की गलती का खामियाजा किसान भुगतेगा या जिम्मेदारी तय होगी?

बालोद। खरीफ गिरदावरी 2026-27 को लेकर बालोद जिले में अब मामला सिर्फ पटवारियों के विरोध तक सीमित नहीं रह गया है। PV ऐप के माध्यम से फसल भौतिक सत्यापन कराने की व्यवस्था को लेकर पटवारियों की आपत्तियों ने डिजिटल राजस्व व्यवस्था की तैयारी और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

गिरदावरी का उद्देश्य खेत में वास्तविक फसल की स्थिति को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करना है। डिजिटल माध्यम इस प्रक्रिया को तेज और व्यवस्थित बनाने का प्रयास हो सकता है, लेकिन जब यही व्यवस्था मैदानी स्तर पर लागू होती है तो मोबाइल, इंटरनेट, GPS, फोटो, नक्शे, लॉगिन और सर्वर जैसे अनेक तकनीकी पहलू सामने आते हैं।

पटवारी संघ द्वारा PV ऐप के विरोध और आंदोलन की चेतावनी की रिपोर्ट सामने आने के बाद अब प्रशासन के सामने इन सवालों का स्पष्ट उत्तर देना महत्वपूर्ण हो गया है।

सवाल नंबर 1—ऐप आखिर डाउनलोड कहां से होगा?

क्या PV ऐप को किसी अधिकृत सरकारी पोर्टल से डाउनलोड किया जाएगा? क्या इसका आधिकारिक ऐप स्टोर लिंक है? यदि किसी पटवारी ने अनधिकृत स्रोत से ऐप डाउनलोड किया तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?

सवाल नंबर 2—हर मोबाइल में चलेगा या विशेष मोबाइल चाहिए?

क्या सामान्य Android मोबाइल से PV ऐप संचालित होगा? न्यूनतम Android वर्जन, RAM, स्टोरेज, कैमरा और GPS की आवश्यकताएं क्या हैं? यदि किसी कर्मचारी का मोबाइल तकनीकी रूप से सक्षम नहीं है तो क्या विभाग वैकल्पिक व्यवस्था देगा?

सवाल नंबर 3—लॉगिन आईडी किसकी होगी?

क्या PV ऐप में पटवारी की मौजूदा विभागीय आईडी से प्रवेश होगा या नई यूजर आईडी जारी की जाएगी? आईडी और पासवर्ड कौन बनाएगा? मोबाइल बदलने पर लॉगिन किस तरह स्थानांतरित होगा?

सवाल नंबर 4—नेटवर्क ने साथ छोड़ा तो क्या होगा?

बालोद के ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में नेटवर्क की स्थिति एक जैसी नहीं है। खेत में पहुंचने के बाद इंटरनेट नहीं मिला तो क्या सत्यापन ऑफलाइन सुरक्षित होगा? बाद में डाटा अपलोड करने का विकल्प रहेगा या नहीं?

सवाल नंबर 5—GPS ने गलत लोकेशन दिखाई तो?

फसल सत्यापन में लोकेशन महत्वपूर्ण है। यदि GPS सिग्नल कमजोर होने के कारण खेत की वास्तविक स्थिति के बजाय कुछ दूरी की लोकेशन दर्ज हो गई तो क्या सिस्टम उसे स्वीकार करेगा? ऐसी त्रुटि सुधारने का अधिकार किस अधिकारी को होगा?

सवाल नंबर 6—पुराना या गलत डिजिटल नक्शा सामने आया तो?

पटवारी संघ की ओर से डिजिटल नक्शों, खसरा विभाजन और मैदानी परिस्थितियों से जुड़ी कठिनाइयों की बात उठाई गई है। यदि ऐप पर दिखाई देने वाली सीमा और मौके की स्थिति में अंतर हो तो पटवारी किस रिकॉर्ड को आधार मानेगा?

सवाल नंबर 7—फोटो अपलोड नहीं हुई तो किसान जिम्मेदार होगा?

बारिश, नेटवर्क या सर्वर की समस्या के कारण फोटो अपलोड नहीं हुई तो क्या किसान की फसल का सत्यापन अधूरा माना जाएगा? क्या दोबारा फोटो लेने और रिकॉर्ड सुधारने की सुविधा उपलब्ध होगी?

सवाल नंबर 8—गलत फसल दर्ज हुई तो सुधार कैसे होगा?

यदि वास्तविक खेत में धान है और तकनीकी या मानवीय गलती से कोई दूसरी फसल दर्ज हो गई तो किसान शिकायत कहां करेगा? संशोधन की समय-सीमा क्या होगी? अंतिम निर्णय किस अधिकारी के पास रहेगा?

सवाल नंबर 9—तकनीकी गलती का नुकसान किसे?

गिरदावरी रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी आगे की प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उपयोग हो सकती है। यदि ऐप की तकनीकी समस्या के कारण वास्तविक फसल दर्ज नहीं हुई तो किसान को भविष्य में परेशानी हो सकती है। ऐसी स्थिति में क्या विभागीय स्तर पर स्वतः सुधार की व्यवस्था होगी?

सवाल नंबर 10—आखिर जवाबदेही किसकी?

सबसे बड़ा सवाल यही है। सत्यापन पटवारी करेगा, ऐप सरकारी डिजिटल व्यवस्था होगी और रिकॉर्ड का उपयोग प्रशासनिक कार्यों में होगा। यदि गलती मोबाइल, GPS, सर्वर, नक्शे या ऐप की तकनीकी समस्या से हुई तो क्या पूरी जिम्मेदारी पटवारी की होगी या संबंधित तकनीकी और प्रशासनिक इकाइयों की भूमिका भी तय होगी?

विरोध का मूल प्रश्न सुविधा नहीं, कार्यप्रणाली है

पटवारियों की आपत्तियों को केवल नई तकनीक से बचने की कोशिश के रूप में देखना पूरे विवाद को सीमित कर सकता है। दूसरी ओर डिजिटल व्यवस्था को बिना पर्याप्त तैयारी के लागू करना भी समस्या पैदा कर सकता है। इसलिए वास्तविक आवश्यकता दोनों पक्षों के बीच स्पष्ट कार्यप्रणाली की है।

प्रशासन यदि PV ऐप को अनिवार्य कर रहा है तो उसे यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि प्रशिक्षण कब और कैसे दिया गया, तकनीकी सहायता कौन देगा, नेटवर्क विफल होने पर वैकल्पिक व्यवस्था क्या होगी, गलत प्रविष्टि कैसे सुधरेगी और किसान की शिकायत का निपटारा किस स्तर पर होगा।

बालोद में अब प्रशासन क्या करेगा देखना होगा 

गिरदावरी की समय-सीमा समाप्त होने से पहले यदि पटवारियों की आपत्तियों का समाधान नहीं हुआ तो विवाद और बढ़ सकता है। वहीं यदि ऐप आधारित सत्यापन में तकनीकी खामियां रहती हैं तो उसका प्रभाव केवल सरकारी कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि किसान के राजस्व रिकॉर्ड तक पहुंच सकता है।

इसलिए अब जरूरत केवल “ऐप चलाओ और गिरदावरी पूरी करो” जैसे निर्देश की नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था की है जिसमें तकनीक के साथ प्रशिक्षण, पारदर्शिता, त्रुटि-सुधार, शिकायत निवारण और स्पष्ट जवाबदेही भी सुनिश्चित हो।

क्योंकि खेत में खड़ी फसल का रिकॉर्ड मोबाइल स्क्रीन पर बदल सकता है, लेकिन उस रिकॉर्ड का असर किसान की वास्तविक जिंदगी पर पड़ सकता है।

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