हमर छत्तीसगढ़

योगदास साहू का हर जिले में भ्रष्टाचार का साम्राज्य, बालोद में रिलीव के बाद भी मनमानी भर्ती में गंदा खेल जारी

बालोद। सामाजिक कार्यकर्ता मोहन निषाद ने सनसनीखेज़ खुलासा करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ का कुख्यात शिक्षा अधिकारी योगदास साहू आज भी भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुका है। 30 सितंबर 2025 को पूर्व डीईओ मर्कले को रिलीव कर दिया गया और नई जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती मधुलिका तिवारी ने कार्यभार संभाल लिया फिर भी स्थानांतरण आदेश के बावजूद साहू बालोद में ही जमे हुए हैं।यह अधिकारी छुट्टियों में भी आत्मानंद स्कूल भर्ती प्रक्रिया को अपनी निजी दुकान की तरह चला रहा है। विभाग की पेंडिंग फाइलें जबरन कब्ज़े में लेकर खुद हस्ताक्षर करता है और जो कर्मचारी इसका विरोध करता है उसके साथ मारपीट गाली-गलौज और बदतमीजी पर उतर आता है। डीईओ कार्यालय बालोद में एक क्लर्क के साथ हाल ही में हुई घटना इसकी ताज़ा मिसाल है।साहू ने खुद को अकेला नहीं छोड़ा। भर्ती प्रक्रिया से हटाए गए डीपी कोसरे को वापस साथ जोड़ लिया और दबाव डालकर लेखराम साहू जैसे कर्मचारियों को अपने गिरोह में शामिल कर लिया। सबसे खतरनाक काम है – निलंबित शिक्षकों की बैकडेट में फर्जी बहाली। यह न केवल गैरकानूनी है बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र के मुंह पर कालिख है।मोहन निषाद ने साफ कहा कि योगदास साहू जहां भी गया, वहाँ भ्रष्टाचार की लंबी गाथा छोड़कर आया –

रायगढ़ जिला – ट्रांसफर और नियुक्तियों की फाइलों को बेचकर लाखों की वसूली। शिक्षकों की पोस्टिंग नोटों की बोली से तय होती थी।

दुर्ग जिला – डिजिटल सिग्नेचर और वेतन आहरण में भारी गड़बड़ी। यहाँ लगभग 50 लाख रुपये का घोटाला उजागर हुआ।

कांकेर जिला – स्कूल भवन निर्माण और फर्नीचर खरीद में घटिया सामग्री उपयोग कर करीब 2 करोड़ का दुरुपयोग।

बालोद जिला (वर्तमान) – आत्मानंद भर्ती प्रक्रिया, निलंबित शिक्षकों की बहाली और पेंडिंग फाइलों से करोड़ों का गोरखधंधा। छुट्टियों में भी डीईओ दफ्तर जाकर काले कारनामे करना इसका जीता-जागता उदाहरण है।

भारतीय न्याय संहिता 2023 (BNNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत साहू की हरकतें सीधे-सीधे दंडनीय अपराध हैं

धारा 316 – पद का दुरुपयोग और आपराधिक विश्वासघात

धारा 318 – धोखाधड़ी और छलपूर्वक लाभ कमाना

धारा 336 – जाली दस्तावेज़ बनाना

धारा 337 – फर्जी दस्तावेज़ों का इस्तेमाल

धारा 61(2) – सरकारी काम में अवैध हस्तक्षेप

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम – रिश्वतखोरी और अवैध लेन-देन

सामाजिक कार्यकर्ता की मांग

बालोद शिक्षा विभाग अब पूरी तरह भ्रष्ट अफसरों का अड्डा बन गया है। रिलीव हो चुका अफसर छुट्टियों में भी दफ्तर घुसकर फाइलों पर कब्ज़ा जमाए और करोड़ों का सौदा करे – यह सीधे प्रशासन की नाकामी है। हिम्मत है तो डीईओ कार्यालय बालोद का सीसीटीवी फुटेज जांचें, सब मिनटों में सामने आ जाएगा।” – मोहन निषाद

अगर योगदास साहू और उसके गिरोह पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो बालोद ही नहीं, पूरा छत्तीसगढ़ शिक्षा के बजाय भ्रष्टाचार का अड्डा कहलाएगा।

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