बालोद जिला: भ्रष्टाचार का अड्डा, नेताओं-अधिकारियों की जेबें गर्म, गरीब बेघर, अमीरों को शानदार आवास, प्रशासन मूकदर्शक

बालोद: छत्तीसगढ़ में बालोद जिला निवासी और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कट्टर समर्थक राजेश साहू, जो पूर्व जनपद सदस्य रह चुके हैं, ने कहा कि बालोद जिला भ्रष्टाचारियों के लिए किसी जंगल से कम नहीं है, जहां अधिकारी और कर्मचारी रोजाना रिश्वतखोरी का खेल रचते हैं।
यह जिला वर्षों से भ्रष्टाचार का गढ़ बना हुआ है और लगता है कि आगे भी ऐसा ही रहेगा। नेताओं का मकसद विकास करना नहीं, बल्कि बड़े-बड़े भाषण देना और तस्वीरें खिंचवाना है, जबकि अधिकारी रिश्वत की रकम सुनते ही अपनी जेबें भरने में जुट जाते हैं। जिले का सबसे बड़ा अधिकारी भी भ्रष्टाचारियों के गिरोह का हिस्सा बन जाता है और उन्हें खुली छूट देता है कि आओ, जनता को लूटो और मौज करो।बालोद में विकास की खोज करना रात के अंधेरे में सूरज ढूंढने जैसा है।
चाहे शिक्षा विभाग हो, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास, श्रम विभाग, खाद्य विभाग, खनिज विभाग या समाज कल्याण विभाग—सभी में भ्रष्टाचार खुलेआम पनप रहा है। हर विभाग जनता की मेहनत की कमाई को लूटकर अपनी तिजोरियां भरने में मगन है, और जिला प्रशासन को यह सब देखकर भी कोई फर्क नहीं पड़ता।ग्राम पंचायत कसहीकला (घिना) इसका जीता-जागता उदाहरण है। यहां कम से कम पच्चीस से तीस गरीब, जो प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र हैं, दर-दर भटक रहे हैं और आंसू बहा रहे हैं। लेकिन प्रशासन की फाइलें और कागजी कार्रवाइयां उनके लिए सबसे बड़ी बाधा बन गई हैं।
गरीबों के लिए प्रशासन के दरवाजे हमेशा बंद रहते हैं, जबकि जिनके पास पहले से ही सुविधायुक्त पक्के मकान हैं, उन्हें योजना का लाभ आसानी से मिल जाता है। यही है बालोद का विकास मॉडल—जहां हकदार ठोकरें खाते हैं और रसूख वाले आराम से लाभ उठाते हैं।जिले में कई जगहों पर प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर दो-दो मंजिला शानदार मकान बनाए गए हैं। लेकिन प्रशासन सब कुछ जानते हुए भी चुप्पी साधे हुए है। गरीबों के लिए प्रशासन न सुनता है, न देखता है, न बोलता है, लेकिन भ्रष्टाचारियों के लिए वह उत्साह से तालियां बजाता है।
यदि प्रशासन को अपनी ईमानदारी और पारदर्शिता पर भरोसा है, तो उसे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने मकानों की स्थिति और आसपास के क्षेत्रों की वीडियो रिकॉर्डिंग कर जनता के सामने पेश करना चाहिए। लेकिन यह हिम्मत किसके पास है? क्योंकि यदि यह सच्चाई सामने आई, तो बालोद के कागजी विकास की पोल पूरी दुनिया के सामने खुल जाएगी।दरअसल, बालोद जिला आज विकास की कहानी नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की एक अनोखी और अविस्मरणीय दास्तान लिख रहा है।




