हमर छत्तीसगढ़

बालोद शिक्षा विभाग की खुली कलई आत्मानंद भर्ती घोटाले से लेकर स्थानांतरण आदेश तक, प्रशासनिक तंत्र में परिवारवाद और लापरवाही का काला सच

बालोद शिक्षा विभाग की खुली कलई आत्मानंद भर्ती घोटाले से लेकर स्थानांतरण आदेश तक, प्रशासनिक तंत्र में परिवारवाद और लापरवाही का काला सच

बालोद शिक्षा विभाग की खुली कलई आत्मानंद भर्ती घोटाले से लेकर स्थानांतरण आदेश तक, प्रशासनिक तंत्र में परिवारवाद और लापरवाही का काला सच

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले का शिक्षा विभाग इन दिनों लगातार विवादों के घेरे में है। अज्ञात सूत्रों से पता चला है कि आत्मानंद विद्यालय भर्ती घोटाले से लेकर अधिकारी डीपी कोसरे के स्थानांतरण प्रकरण तक, हर घटना विभाग की पक्षपातपूर्ण और नियमविहीन कार्यशैली को उजागर करती है। यह स्थिति केवल भ्रष्टाचार की ओर इशारा नहीं करती बल्कि यह दर्शाती है कि विभागीय ढांचा कितनी गहराई तक गिर चुका है।हाल ही में आत्मानंद विद्यालय की भर्ती में अंजलि कोसरे का चयन हुआ, जो नोडल अधिकारी रहे डीपी कोसरे की बेटी हैं।

अंजलि की मां आरती कोसरे राणा खुज्जी के आत्मानंद स्कूल में पदस्थ हैं। यह पूरा मामला परिवारवाद की ओर साफ इशारा करता है। चयन प्रक्रिया मेरिट, पारदर्शिता और निष्पक्षता की धज्जियां उड़ाकर की गई। विरोध बढ़ने पर डीपी कोसरे को औपचारिक रूप से हटाकर लेखराम साहू को नोडल बना दिया गया, लेकिन असली नियंत्रण कोसरे के पास ही रहा। परिवारवाद और दलाली के इस खेल में योग्य अभ्यर्थियों को दरकिनार किया गया और मोटी रकम लेकर चयन सुनिश्चित किया गया। यह शिक्षा विभाग बालोद की साख पर बड़ा धब्बा है।इसी बीच कोसरे का स्थानांतरण धमतरी कर दिया गया, लेकिन अब तक उन्हें रिलीव नहीं किया गया है। सवाल यह है कि जब राज्य शासन से आदेश जारी हो चुका है, तो उन्हें यहां रोके रखने की जिद किसलिए है? आरोप है कि कोसरे जानबूझकर संशोधन के चक्कर में उलझे हुए हैं ताकि बालोद में अपनी पकड़ बनाए रखें।

विभागीय अधिकारियों की ढिलाई और जानबूझकर की जा रही देरी, दोनों मिलकर यह संकेत देते हैं कि नियमों से ऊपर व्यक्तिगत हितों को प्राथमिकता दी जा रही है।बालोद की जनता और शिक्षा जगत यह सवाल पूछ रहा है कि आखिर एक विवादास्पद अधिकारी को बचाने में जिला प्रशासन क्यों जुटा है? स्थानांतरण आदेश का पालन न होना सीधे-सीधे शासन के निर्णय का अपमान है। यदि एक सामान्य शिक्षक को आदेश की अवहेलना करने पर कठोर दंड झेलना पड़ता है तो फिर कोसरे को विशेष छूट क्यों? यह पक्षपात विभाग की विश्वसनीयता को गहरा आघात पहुँचाता है।आत्मानंद भर्ती घोटाला और स्थानांतरण आदेश की अवहेलना दोनों घटनाएं मिलकर यह साबित करती हैं कि बालोद शिक्षा विभाग पारदर्शिता और जवाबदेही से कोसों दूर है।

विभाग इस पूरे घोटाले पर लीपापोती करने के लिए शिक्षक संहिता का सहारा लेंगे। यह वही संहिता है जिसे आदर्श और नैतिकता का प्रतीक माना जाना चाहिए था। मगर आज उसे भ्रष्टाचारियों को बचाने और जांच को भटकाने का औज़ार बना रहे है।यह केवल व्यक्तिगत भ्रष्टाचार नहीं बल्कि प्रशासनिक नैतिकता का पतन है।अब समय आ गया है कि शासन हस्तक्षेप कर कठोर कदम उठाए। कोसरे को तत्काल कार्यमुक्त किया जाए और आत्मानंद भर्ती घोटाले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो बालोद की शिक्षा व्यवस्था हमेशा के लिए अविश्वसनीय हो जाएगी और योग्य युवाओं का भविष्य प्रशासनिक सौदों में कुर्बान होता रहेगा।

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