किसानों के हक पर डाका मां दन्तेश्वरी शक्कर कारखाना के महा प्रबंधक पर उठ रहे हैं सवाल

किसानों के हक पर डाका मां दन्तेश्वरी शक्कर कारखाना के महा प्रबंधक और पर उठ रहे हैं सवाल

बालोद:- छत्तीसगढ़ का बालोद जिला इन दिनों मां दन्तेश्वरी शक्कर कारखाने की बदहाली और भ्रष्टाचार के चलते सुर्खियों में है। सूत्रों से पता चला है कि किसानों की मेहनत और पसीने से खड़ा हुआ यह कारखाना अब उनकी उम्मीदों पर पानी फेर रहा है। गन्ना खरीदी में धांधली, भुगतान में महीनों की देरी और उत्पादन क्षमता में भारी गिरावट ने इस प्रतिष्ठान को किसानों के लिए अभिशाप बना दिया है।
एमडी पर गंभीर आरोप
कारखाने के लिलेश्वर देवांगन महाप्रबंधक पर किसानों ने सीधा आरोप लगाया है कि वे जानबूझकर व्यवस्थाओं को लचर बनाए हुए हैं। किसानों का कहना है कि भुगतान अटकाने से लेकर गन्ना तौल में गड़बड़ी तक, हर जगह उनके करीबी कर्मचारियों की मिलीभगत है। उनकी कार्यशैली पारदर्शिता से कोसों दूर है और कारखाने को निजी लाभ का अड्डा बना दिया गया है।
सहकारी अधिनियम की अवमानना
कारखाना सहकारी समिति अधिनियम के तहत संचालित है, जिसमें किसानों के हितों की सुरक्षा और पारदर्शी प्रबंधन की कानूनी बाध्यता है। लेकिन यहां इन नियमों की खुली अवहेलना की जा रही है। समय पर भुगतान न करना, गन्ना खरीदी में मनमानी करना और उत्पादन खर्च का ब्योरा सार्वजनिक न करना—ये सभी अधिनियम की धारा का उल्लंघन है। कानूनी रूप से यह बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की सीधी जिम्मेदारी है, लेकिन आज तक किसी पर कार्रवाई नहीं हुई।
किसानों का गुस्सा और संघर्ष
गन्ना उत्पादकों का कहना है कि कई बार ज्ञापन देने और धरना-प्रदर्शन करने के बावजूद न तो सरकार और न ही कारखाना प्रबंधन ने उनकी आवाज़ सुनी। किसान संगठनों का आरोप है कि महाप्रबंधक अपनी कुर्सी बचाने के लिए अधिकारियों और नेताओं की कृपा-दृष्टि बनाए रखने के लिए नारियल चढ़ाते है। यही वजह है कि किसानों की समस्याएं लगातार अनदेखी हो रही हैं।

मशीनों की जर्जर हालत
कारखाने की मशीनरी वर्षों से अपडेट नहीं की गई है। कई बार उत्पादन सीजन के बीच में ही मशीनें बंद हो जाती हैं और गन्ना बाहर सड़ने लगता है। किसानों की मेहनत पर यह सीधा कुठाराघात है। महाप्रबंधक की लापरवाही से कारखाना घाटे में जा रहा है और किसान दोहरी मार झेल रहे हैं।
सरकार से सख्त कदम की मांग
किसानों ने मांग की है कि महाप्रबंधक लिलेश्वर देवांगन की पूरी जांच हो, और सहकारी अधिनियम के उल्लंघन पर तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाए और कारखाने का आधुनिकीकरण सुनिश्चित किया जाए। अगर सरकार ठोस कदम नहीं उठाती, तो किसान बड़े आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं।फिलहाल मां दन्तेश्वरी शक्कर कारखाना किसानों के लिए सहारा नहीं, बल्कि दर्द का सबब बन गया है।




