हमर छत्तीसगढ़

चूल्हा–चौका से चौथे स्तंभ तक महिला पत्रकारों की सशक्त आवाज़ और बदलते भारत की तस्वीर

 

राजनांदगांव : छत्तीसगढ़ में कभी महिलाओं और लड़कियों की पहचान घर की चारदीवारी, चूल्हा–चौका और पारिवारिक दायित्वों तक सीमित मानी जाती थी। समाज ने उनके सपनों की उड़ान को परंपराओं की बेड़ियों में बांध रखा था। लेकिन आज का आधुनिक भारत उस सोच को पीछे छोड़ चुका है। आज महिलाएं न केवल अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं, बल्कि लोकतंत्र, प्रशासन, शिक्षा, विज्ञान और पत्रकारिता जैसे क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। यह बदलते भारत की वही तस्वीर है, जहां महिला सशक्तिकरण शब्द नहीं, बल्कि सशक्त उपस्थिति बन चुका है।इसी सशक्त बदलाव का जीवंत उदाहरण हाल ही में गुजरात अध्ययन भ्रमण से लौटी छत्तीसगढ़ की महिला पत्रकारों की मुख्यमंत्री से हुई संवादपूर्ण भेंट में देखने को मिला।मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित इस मुलाकात ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि जब महिलाएं निर्भीक होकर सवाल पूछती हैं और सच को शब्दों में ढालती हैं, तब समाज और लोकतंत्र दोनों मजबूत होते हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि पत्रकारिता केवल समाचार लिखने का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना जगाने का सशक्त औजार है। महिला पत्रकार आज इस जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी, संवेदनशीलता और साहस के साथ निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि जिस समाज में महिलाएं कलम थाम लेती हैं, वहां बदलाव अवश्यंभावी हो जाता है। कठिन हालात, दबाव और चुनौतियों के बावजूद महिला पत्रकारों का सच के साथ खड़ा रहना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। ऐसे अध्ययन भ्रमण महिलाओं की दृष्टि को व्यापक बनाते हैं और उनके लेखन में अनुभवों की गहराई जोड़ते हैं।इस पूरे प्रसंग में राजनांदगांव जिले के छोटे से गांव की साहू समाज से ताल्लुख रखने वाली महिला पत्रकार नीरा साहू की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जो गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करते हुए भी पत्रकारिता जैसे जोखिम भरे और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में डटी हुई हैं। सीमित संसाधन, आर्थिक तंगी और सामाजिक दबावों के बावजूद ये महिलाएं घर-परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए सच्चाई की खोज में मैदान में उतरती हैं। कई बार उन्हें न पर्याप्त साधन मिलते हैं, न सुविधाएं, फिर भी समाज और देश के हित में खबरों को सामने लाने का जज़्बा उनके हौसले को कमजोर नहीं होने देता।गांवों से निकलकर महिला पत्रकार यह साबित कर रही हैं कि पत्रकारिता केवल बड़े शहरों या संपन्न वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस संघर्ष की आवाज़ है जो हाशिये पर खड़े लोगों के बीच से उठती है। घर के चूल्हे की चिंता, बच्चों की पढ़ाई, रोजमर्रा की जरूरतें और आर्थिक अभाव—इन सबके बीच जोखिम उठाकर खबर बनाना उनके लिए साधारण कार्य नहीं, बल्कि साहस और आत्मबल की मिसाल है। कई बार असुरक्षा, उपेक्षा और दबाव का सामना करते हुए भी ये महिला पत्रकार सच के साथ खड़ी रहती हैं।ऐसी महिला पत्रकारों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि आधुनिक भारत में महिलाएं अब केवल परिस्थितियों की शिकार नहीं रहीं, बल्कि परिस्थितियों को बदलने वाली शक्ति बन चुकी हैं। गांव की ये महिलाएं पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी मानकर निभा रही हैं। उनका संघर्ष यह संदेश देता है कि सीमित साधन भी यदि मजबूत संकल्प से जुड़ जाएं, तो लोकतंत्र की नींव को और मजबूत किया जा सकता है।गुजरात अध्ययन भ्रमण से लौटी महिला पत्रकारों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि यह छत्तीसगढ़ के इतिहास में एक नई पहल है, जहां महिला पत्रकारों को अन्य राज्य की कार्यप्रणाली, संस्कृति और प्रशासनिक मॉडल को करीब से देखने का अवसर मिला। यह केवल यात्रा नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और पेशेवर पहचान को मजबूत करने वाला अनुभव रहा। दल की ओर से पारंपरिक गुजराती अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ भेंट कर कृतज्ञता व्यक्त की गई।पत्रकारों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह भ्रमण उनके लिए सीख और संवाद का मंच बना। बालोद की मीना साहू और राजनांदगांव की नीरा साहू ने बताया कि इस यात्रा ने उन्हें न केवल अन्य राज्यों की व्यवस्थाओं को समझने का अवसर दिया, बल्कि आपसी सहयोग और एकजुटता को भी मजबूत किया। कई महिला पत्रकारों के लिए यह पहली हवाई यात्रा थी, जिसने उनके जीवन में आत्मविश्वास की नई ऊंचाई जोड़ी।मुख्यमंत्री ने गुजरात विधानसभा, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग, राजकोट और पोरबंदर जैसे स्थलों के भ्रमण का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अनुभव पत्रकारों की लेखनी को अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनाते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि इस यात्रा के अनुभवों को पुस्तक के रूप में संजोया जाए, ताकि यह भविष्य की महिला पत्रकारों के लिए मार्गदर्शक बने।इस दौरान गुजरात के उन्नत प्रशासनिक मॉडल, सहकारिता व्यवस्था और तकनीकी नवाचारों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पारदर्शिता और सहभागिता को प्राथमिकता देते हुए इन मॉडलों को अपनाया जा रहा है। पत्रकारों ने गुजरात विधानसभा में बच्चों और आम नागरिकों के लिए की गई व्यवस्थाओं को लोकतंत्र की जीवंत मिसाल बताया।एक रोचक अनुभव साझा करते हुए महिला पत्रकारों ने बताया कि भ्रमण के दौरान विदेशी पर्यटकों ने छत्तीसगढ़ को उसके मुख्यमंत्री के नाम से पहचाना, जो राज्य की बढ़ती पहचान का प्रतीक है। उन्होंने जनसंपर्क विभाग की भूमिका की भी सराहना की, जिसने पूरे भ्रमण को सुचारु और स्मरणीय बनाया।

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