“ज़हर पर चुप क्यों सरकार?” – मिलावटी खाद्य माफिया के खिलाफ आम आदमी पार्टी का उग्र एलान, सड़क से संसद तक संग्राम

रिपोर्टर:- मीनू साहु
बालोद – देश की थाली में परोसा जा रहा ज़हर अब सिर्फ अफवाह नहीं, बल्कि एक भयावह सच्चाई बन चुका है। इसी मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद में जोरदार तरीके से आवाज उठाई और खाद्य मिलावट के संगठित खेल को राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपदा करार दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि मुनाफाखोर कंपनियां “हेल्दी” और “एनर्जी” के नाम पर देशवासियों की सेहत से खुला खिलवाड़ कर रही हैं।संसद में गूंज उठी इस आवाज की प्रतिध्वनि अब बालोद की सड़कों पर सुनाई दे रही है। आम आदमी पार्टी बालोद ने प्रशासन को कड़ा ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी है कि यदि खाद्य माफिया पर तुरंत शिकंजा नहीं कसा गया तो उग्र आंदोलन होगा। पार्टी नेताओं ने कहा कि अब जनता चुप नहीं बैठेगी, क्योंकि यह लड़ाई सीधे जीवन और स्वास्थ्य की है।प्रदेश संयुक्त सचिव दीपक आरदे ने तीखे शब्दों में हमला बोलते हुए कहा कि आज बाजार की हर जरूरी चीज शक के घेरे में है।

दूध में पोषण नहीं, मिलावट का ज़हर घुला है। सब्जियों में रसायनों का इंजेक्शन, मसालों में मिलावटी पाउडर, मिठाइयों में घटिया तेल, जूस में नकली रंग—यह सब खुलेआम बिक रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि लालच के इस अंधे खेल में बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं की सेहत दांव पर लगाई जा रही है।उन्होंने यह भी कहा कि जांच के आंकड़े खुद गवाही दे रहे हैं कि बड़ी संख्या में खाद्य नमूनों में गड़बड़ी पाई जा रही है। “हर चौथा सैंपल संदिग्ध निकले तो समझिए कि सिस्टम में सड़ांध कितनी गहरी है,” उन्होंने तंज कसा।
किसान विंग के प्रदेश अध्यक्ष तारेंद्र चंद्राकर ने सवाल उठाया कि आखिर खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाली एजेंसियां क्या कर रही हैं? उन्होंने कहा कि एक मां अपने बच्चे को भरोसे के साथ दूध देती है, लेकिन उसे यह नहीं मालूम कि उसके भरोसे के साथ विश्वासघात हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्पादन और बिक्री के आंकड़ों में भारी अंतर इस बात का संकेत है कि बाजार में नकली और मिलावटी उत्पादों का जाल फैला हुआ है।

जिला अध्यक्ष बालक साहू ने भी कड़े शब्दों में कहा कि जिन उत्पादों पर विदेशों में प्रतिबंध लगाया गया, वे भारत में धड़ल्ले से बिक रहे हैं। यह दोहरा मापदंड आखिर क्यों? क्या भारतीय उपभोक्ताओं की सेहत की कोई कीमत नहीं? उन्होंने मांग की कि संदिग्ध कंपनियों और निर्माताओं की सूची सार्वजनिक की जाए और दोषियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई हो।
जिला मीडिया प्रभारी पंकज जैन ने प्रशासन को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि यदि फैक्ट्रियों, राइस मिलों, बड़े स्टोर्स और मिठाई दुकानों में व्यापक जांच अभियान तुरंत शुरू नहीं हुआ, तो आम आदमी पार्टी सड़कों पर उतरेगी। “चक्काजाम होगा, जनआंदोलन होगा और जिम्मेदार मंत्री का पुतला दहन भी,” उन्होंने ऐलान किया।आम आदमी पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि यह मुद्दा राजनीतिक नहीं, जनस्वास्थ्य का है। पार्टी का कहना है कि जब तक मिलावटखोरों को सख्त सजा नहीं मिलती और खाद्य जांच व्यवस्था पारदर्शी नहीं बनती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। अब सवाल सीधा है—क्या सरकार जनता की थाली को सुरक्षित बनाएगी या मुनाफाखोरों के साथ खड़ी रहेगी?



