भाजपा की अपनी चिट्ठी ने खोली सरकार की पोल! DMF पर उठे करोड़ों के सवाल
स्कूलों में न भवन, न शिक्षक, न सुविधाएं… फिर 5 करोड़ के विज्ञान केंद्र का प्रस्ताव क्यों? कांग्रेस ने पूछा—DMF की राशि जनता के लिए या मनमानी योजनाओं के लिए?

संपादक:- मीनू साहू
बालोद। बालोद जिले में जिला खनिज न्यास निधि यानी DMF की राशि के इस्तेमाल को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। जिला कांग्रेस कमेटी ने भाजपा युवा मोर्चा द्वारा मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन को ही भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा सवालिया निशान बताते हुए तीखा हमला बोला है।
कांग्रेस प्रवक्ता मोंटू चंद्राकर ने कहा कि भाजपा के अपने ही संगठन ने जिले की शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को लेकर सरकार के सामने सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस के मुताबिक ज्ञापन में भवनविहीन स्कूल, जर्जर विद्यालय, शिक्षकों की कमी और विद्यार्थियों के लिए शौचालय सहित मूलभूत सुविधाओं की कमी का उल्लेख किया गया है।
सबसे बड़ा सवाल ग्राम खम्हारटोला के प्राथमिक शाला में 5 करोड़ रुपये की लागत से विज्ञान केंद्र के प्रस्ताव को लेकर उठाया गया है। कांग्रेस ने सवाल किया कि जब स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त भवन तक नहीं हैं, शिक्षक कम हैं और बुनियादी सुविधाएं अधूरी हैं, तब करोड़ों रुपये की राशि किस प्राथमिकता के तहत विज्ञान केंद्र पर प्रस्तावित की जा रही है?
कांग्रेस का आरोप है कि DMF का मूल उद्देश्य खनिज प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक जरूरतों को पूरा करना है, लेकिन अगर जरूरी सुविधाएं पीछे छूट रही हैं और करोड़ों की दूसरी योजनाएं प्राथमिकता पा रही हैं, तो सरकार को जनता के सामने पूरा हिसाब रखना चाहिए।
मोंटू चंद्राकर ने सवाल उठाया कि पिछले दो वर्षों में DMF से कितने कार्य स्वीकृत हुए? किस कार्य पर कितनी राशि मंजूर हुई? वास्तविक भुगतान कितना हुआ? कार्य किस एजेंसी को दिया गया और उसकी वर्तमान स्थिति क्या है? इन सवालों के जवाब सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे हैं?
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि खनिज प्रभावित क्षेत्रों की जनता आज भी सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और रोजगार जैसी समस्याओं से जूझ रही है, जबकि सरकारी स्तर पर करोड़ों रुपये खर्च होने की तस्वीर पेश की जाती है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि कांग्रेस के बयान से नहीं होती, लेकिन कांग्रेस ने मांग की है कि DMF के पिछले दो वर्षों के सभी कार्यों की स्वतंत्र जांच कराकर पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए।
कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा सरकार के खिलाफ आरोप लगाने वाला अब केवल विपक्ष नहीं है। अगर भाजपा का अपना संगठन ही सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा कर रहा है, तो सरकार को विपक्ष को जवाब देने से पहले अपने ही लोगों के सवालों का जवाब देना चाहिए।



