कलेक्टर की निगरानी में भ्रष्टाचार चरम पर?
जेवरतला में सरकारी जमीन को लेकर हाई कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी का आरोप

संपादक:- मीनू साहू
बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में कलेक्टर के निगरानी पर भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा में पहुंच गया है। इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण ग्राम पंचायत जेवरतला रोड में देखने को मिल रहा है। ग्रामीण सरकारी जमीन को अवैध कब्जा से मुक्त कराने के लिए तहसील से लेकर हाई कोर्ट तक लड़ाई लड़ी है।
हाई कोर्ट के निर्देश का उल्लंघन सरपंच से लेकर पटवारी, तहसीलदार, एसडीएम, कलेक्टर सभी कर रहे हैं। सख्त निर्देश है कि सरकारी जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराए, परन्तु कलेक्टर हो रहे अवैध निर्माण को रोक पाने में असक्षम है।
ग्रामीणों का कहना है कि बालोद जिला से बड़ा भ्रष्टाचार पूरा भारत देश में देखने को नहीं मिलेगा। चंद सिक्कों की खनक में कानून को भी ठेंगा दिखाकर अपनी मनमानी करते हुए सरकारी जमीन को निजी नाम करने पर उतारू हो गया है।
सूत्रों से पता चला है कि सरपंच से लेकर पटवारी, तहसीलदार, एसडीएम से लेकर जिले के सबसे बड़े मैडम साहिबा तक रिश्वत पहुंच चुका है। हालांकि इस संबंध में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इस संबंध में आवेदक भीष्म साहू ने बताया कि बालोद जिला भ्रष्टाचार के चारागाह के रूप में पूरा छत्तीसगढ़ में फेमस हो चुका है। हर अधिकारी बालोद जिला को लालच भरी निगाह से देखता है।
आगे उन्होंने बताया कि मैं एक सेना का जवान हूं। समय कम मिलता है फिर भी जब मुझे पता चला कि भ्रष्टाचार जिले में गंभीर रूप से पैठ बना चुका है, तब मैंने सोचा कि इस लड़ाई से अपने गांव से ही शुरू करूंगा। सरहद की रक्षा से जब भी समय मिलता है, तब इस तरह की अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ लड़ाई लड़ता हूं। समय का अभाव की वजह से कभी-कभार लेट हो जाता हूं, फिर भी अपने काम को अंजाम देता हूं।
सोचने में मजबूर हूं, हाई कोर्ट के निर्देश के बाद भी बालोद जिला के अधिकारी उच्च न्यायालय से अपने आप को ऊपर समझ कर अपना कर्तव्य भी भूल जाते हैं। दुर्भाग्य है बालोद जिला का।



