हमर छत्तीसगढ़

बालोद में गैस सिलेंडर की डिलीवरी पर बड़ा सवाल! उपभोक्ता की जेब पर कौन डाल रहा अतिरिक्त बोझ?

पूरे जिले की LPG व्यवस्था सवालों के घेरे में—ओवरचार्जिंग, वजन, डिलीवरी और रिकॉर्ड की जांच के बिना कैसे सामने आएगी असली तस्वीर?

संपादक:- मीनू साहू

बालोद। रसोई गैस हर परिवार की जरूरत है, लेकिन इसी जरूरी सेवा से जुड़ी वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े किए जा सकते हैं। क्या जिले के उपभोक्ताओं को सिलेंडर निर्धारित कीमत और नियमों के मुताबिक मिल रहा है, या डिलीवरी के नाम पर कहीं अतिरिक्त राशि वसूली जा रही है?मामला किसी एक एजेंसी तक सीमित मानकर छोड़ने के बजाय पूरे बालोद जिले की LPG वितरण व्यवस्था की जांच की जरूरत है। बुकिंग से लेकर डिलीवरी तक यदि व्यवस्था साफ है तो बिल में दर्ज राशि, उपभोक्ता से लिया गया भुगतान और वास्तविक डिलीवरी रिकॉर्ड में कोई अंतर नहीं होना चाहिए।

सिलेंडर का वजन—कितनी होती है वास्तविक जांच?

सिलेंडर मिलने के समय वजन और लीकेज की जांच महत्वपूर्ण है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जिले में कितने उपभोक्ताओं को मौके पर वजन जांचने की सुविधा सहज रूप से उपलब्ध होती है?यदि किसी उपभोक्ता को वजन कम होने का संदेह हो तो शिकायत के बाद कार्रवाई की प्रक्रिया क्या है? शिकायतों का रिकॉर्ड कौन रखता है और उनकी जांच कितनी गंभीरता से होती है?

सिर्फ कागजों में व्यवस्था मजबूत बताने से उपभोक्ता के सवाल खत्म नहीं होंगे।

डिलीवरी के नाम पर अतिरिक्त रकम का हिसाब कौन देगा?

सिलेंडर की निर्धारित कीमत के अतिरिक्त यदि कहीं कोई राशि ली जाती है तो उसका स्पष्ट आधार और रसीद होना चाहिए। उपभोक्ता को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि उसने किस मद में कितना भुगतान किया।यहीं से जांच का असली रास्ता खुलता है—बुकिंग राशि और वास्तविक भुगतान का मिलान किया जाए।

रिकॉर्ड खोला तो सामने आ सकती है पूरी तस्वीर

पूरे जिले में जांच की जरूरत हो तो केवल एजेंसी संचालकों से जवाब लेना पर्याप्त नहीं होगा। बुकिंग रिकॉर्ड, बिक्री विवरण, स्टॉक रजिस्टर, डिलीवरी रिकॉर्ड, बिल, डिजिटल भुगतान और उपभोक्ता शिकायतों का आपस में मिलान किया जाना चाहिए।कितने सिलेंडर बुक हुए? कितने वितरित हुए? किस कीमत पर बिल बना? कितना भुगतान लिया गया? कितनी शिकायतें दर्ज हुईं और उनका समाधान कैसे हुआ?इन सवालों के दस्तावेजी जवाब व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने ला सकते हैं।

खाद्य विभाग की निगरानी पर भी उठे सवाल

अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की है। क्या पूरे बालोद जिले में नियमित और औचक जांच होती है? क्या उपभोक्ताओं से वास्तविक जानकारी ली जाती है? क्या शिकायतों के बाद सिर्फ कागजी कार्रवाई होती है या मौके पर भी जांच पहुंचती है?यदि व्यवस्था में कोई गड़बड़ी नहीं है तो विभाग रिकॉर्ड सार्वजनिक जांच के लिए सामने रखकर स्थिति स्पष्ट कर सकता है। और यदि अनियमितता मिलती है तो जिम्मेदारी तय होना भी जरूरी है।सवाल किसी एक एजेंसी पर आरोप लगाने का नहीं, बल्कि बालोद जिले के हर LPG उपभोक्ता के अधिकार और उसकी जेब की सुरक्षा का है।अब देखना यह है कि खाद्य विभाग रिकॉर्ड की गहराई तक पहुंचकर जांच करता है या फिर उपभोक्ताओं के सवाल फाइलों के नीचे दबे रहेंगे?यह रिपोर्ट LPG वितरण व्यवस्था से जुड़े जांच योग्य सवालों पर केंद्रित है। किसी विशिष्ट एजेंसी या विक्रेता पर अनियमितता सिद्ध होने का दावा नहीं किया जा रहा है। संबंधित पक्ष का जवाब मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना चाहिए।

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