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गणपति बप्पा के स्वागत को तैयार बालोद, आस्था और उत्साह से सज रहा शहर

14 सितंबर को गणेश चतुर्थी पर घर-घर गूंजेगा गणपति बप्पा मोरया का जयघोष, मूर्तिकार प्रतिमाओं को दे रहे अंतिम रूप, जगह-जगह सज रहे आकर्षक पंडाल

संपादक:- मीनू साहू 

बालोद। गणेश चतुर्थी को लेकर बालोद जिले में उत्साह का माहौल बनने लगा है। 14 सितंबर को मनाई जाने वाली गणेश चतुर्थी को लेकर शहर से लेकर आसपास के क्षेत्रों तक तैयारियां तेज हो गई हैं। जगह-जगह गणेश उत्सव समितियों द्वारा पंडाल तैयार किए जा रहे हैं, वहीं मूर्तिकार भगवान गणेश की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। बाजारों में भी गणेश उत्सव को लेकर चहल-पहल दिखाई देने लगी है।भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश पूजन से करने की परंपरा भारतीय संस्कृति में सदियों से चली आ रही है। यही कारण है कि गणेश चतुर्थी केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, सामाजिक सहभागिता और सामूहिक उत्साह का अवसर भी बन चुका है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इस पर्व को अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है और बालोद भी इससे अछूता नहीं है।

मूर्तिकारों के हाथों में आकार ले रहे गणपति

बालोद में मूर्तिकार इन दिनों गणेश प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में व्यस्त हैं। मिट्टी और अन्य सामग्री से तैयार की गई प्रतिमाओं पर रंग-रोगन, सजावट और आकर्षक स्वरूप देने का काम तेजी से चल रहा है। मूर्तिकारों का कहना है कि गणेश प्रतिमाओं को तैयार करने में काफी मेहनत लगती है और श्रद्धालुओं की पसंद के अनुरूप प्रतिमाओं को आकार दिया जाता है।किसी प्रतिमा में भगवान गणेश का शांत स्वरूप नजर आ रहा है तो कहीं आकर्षक मुकुट और अलंकरण श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। प्रतिमाओं के अंतिम रूप में आने के साथ ही मूर्तिकारों की मेहनत भी अब दिखाई देने लगी है।

पंडालों में शुरू हुई सजावट

गणेश उत्सव को लेकर शहर के विभिन्न हिस्सों में समितियों ने पंडाल सजाने का काम शुरू कर दिया है। कहीं साधारण तो कहीं आकर्षक थीम पर पंडाल तैयार किए जा रहे हैं। युवाओं और गणेश उत्सव समितियों के सदस्य दिन-रात तैयारियों में जुटे हुए हैं।गणेश स्थापना के बाद कई स्थानों पर धार्मिक कार्यक्रम, आरती, भजन और अन्य आयोजन किए जाने की तैयारी भी की जा रही है। इससे आने वाले दिनों में बालोद का माहौल पूरी तरह गणेशमय होने की उम्मीद है।

आस्था के साथ पर्यावरण और व्यवस्था का भी ध्यान जरूरी

गणेश उत्सव उत्साह और आस्था का पर्व है, लेकिन इसके साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी जुड़ी है। उत्सव समितियों और श्रद्धालुओं को पंडालों में सुरक्षा व्यवस्था, स्वच्छता, यातायात व्यवस्था और ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों का ध्यान रखना चाहिए। प्रतिमा विसर्जन के दौरान भी पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना जरूरी है।गणेश उत्सव तभी और अधिक सार्थक होगा, जब धार्मिक आस्था के साथ स्वच्छता, सद्भाव और सामाजिक जिम्मेदारी भी दिखाई दे। बालोद की परंपरा रही है कि यहां पर्व-त्योहारों में समाज के विभिन्न वर्ग मिलकर उत्सव मनाते हैं। गणेश चतुर्थी भी इसी सामाजिक एकता को मजबूत करने का अवसर है।फिलहाल बालोद में गणपति बप्पा के स्वागत की तैयारियां अपने अंतिम दौर में पहुंच रही हैं। मूर्तिकारों की कार्यशालाओं से लेकर सजते पंडालों तक हर जगह एक ही उत्साह नजर आ रहा है। श्रद्धालु बेसब्री से उस पल का इंतजार कर रहे हैं, जब विघ्नहर्ता गणपति की स्थापना के साथ शहर में एक बार फिर गूंज उठेगा—“गणपति बप्पा मोरया।”

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