गुण्डरदेही में जल प्रलय निचली बस्तियां पानी में डूबीं, नगर पंचायत की व्यवस्था की खुली पोल!
नगर पंचायत गुण्डरदेही के वार्ड क्रमांक 5 दमाद पारा में नदी का पानी घुसने से जनजीवन बेहाल, जलभराव ने उजागर की नालियों, जल निकासी और आपदा प्रबंधन की बदहाली अधिकारी और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर उठे गंभीर सवाल।

संपादक :- मीनू साहू
बालोद/गुण्डरदेही :- बालोद जिला में बारिश के बीच गुण्डरदेही नगर पंचायत क्षेत्र की निचली बस्तियों में पानी भरने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। वार्ड क्रमांक 5 दमाद पारा में नदी का पानी पहुंचने की स्थिति ने स्थानीय व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है। जिन गलियों और घरों में लोगों को सुरक्षित रहना चाहिए, वहां पानी का कहर परेशानी का सबब बन गया है। जलभराव ने नगर पंचायत के उन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनमें नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने और बरसात में राहत देने की जिम्मेदारी शामिल है।
दमाद पारा में नदी का पानी, आखिर कहां गई नगर पंचायत की तैयारी?
दमाद पारा में नदी का पानी बस्ती तक पहुंचना केवल प्राकृतिक परिस्थितियों का मामला नहीं, बल्कि शहरी जल निकासी की तैयारियों की भी परीक्षा है। बारिश के मौसम में निचले इलाकों में पानी भरने की आशंका पहले से रहती है। ऐसे में नगर पंचायत के अधिकारियों और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी थी कि संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर जल निकासी, नालों की सफाई और आपातकालीन इंतजाम सुनिश्चित किए जाते।लेकिन मौजूदा हालात ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम उठाए गए होते, तो क्या दमाद पारा के रहवासियों को इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता? नगर पंचायत के जिम्मेदारों को इसका स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
जनता पानी में परेशान, जिम्मेदारों की जवाबदेही कहां?
गुण्डरदेही की निचली बस्तियों में रहने वाले नागरिक भी नगर पंचायत को नियमित रूप से कर और अन्य शुल्क देते हैं। बदले में उन्हें सुरक्षित आवासीय वातावरण, सुचारु नालियां और मूलभूत नागरिक सुविधाएं मिलना उनका अधिकार है। बरसात आते ही यदि बस्तियों में पानी भरने लगे, तो यह स्थानीय निकाय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
नगर पंचायत के अधिकारी क्या केवल कार्यालयीन कागजी कार्रवाई तक सीमित हैं? क्या जनप्रतिनिधियों को अपने वार्डों की वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं है? यदि जानकारी है, तो जलभराव से निपटने के लिए किए गए उपायों का विवरण सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता?
इन सवालों का उत्तर देना प्रशासनिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। जनता को आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाली व्यवस्था चाहिए।
हर बारिश में संकट, फिर भी स्थायी समाधान का इंतजार!
दमाद पारा सहित निचली बस्तियों में जलभराव की समस्या को गंभीरता से लेते हुए नगर पंचायत को नदी के जलस्तर, नालों की क्षमता, निकासी मार्गों और संवेदनशील मकानों का तकनीकी आकलन कराना चाहिए। केवल अस्थायी सफाई या पानी निकलने का इंतजार करना पर्याप्त नहीं होगा।
यदि नालियों का पानी नदी में जाने का मार्ग बाधित है, तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। जहां जल निकासी की संरचना अपर्याप्त है, वहां सुधार की कार्ययोजना बननी चाहिए। साथ ही प्रभावित परिवारों के लिए सुरक्षित स्थान, आवश्यक सहायता और आपातकालीन संपर्क व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
नगर पंचायत के जनप्रतिनिधियों को भी स्पष्ट करना चाहिए कि प्रभावित वार्डों में निरीक्षण कब किया गया, अधिकारियों को क्या निर्देश दिए गए और समस्या के स्थायी निराकरण के लिए कितनी राशि स्वीकृत की गई है।
जवाबदेही तय हो, दिखावे की कार्रवाई नहीं!
गुण्डरदेही में वार्ड क्रमांक 5 दमाद पारा की स्थिति स्थानीय प्रशासन के लिए चेतावनी है। यदि समय रहते जल निकासी और बाढ़ नियंत्रण के इंतजाम नहीं सुधारे गए, तो आने वाली बारिश में भी यही संकट दोहराया जा सकता है।
नगर पंचायत के मुख्य नगर पालिका अधिकारी और संबंधित जनप्रतिनिधियों को मौके पर पहुंचकर स्थिति का आकलन करना चाहिए। जलभराव के कारणों की जांच, जिम्मेदार विभागों की भूमिका और सुधार कार्यों की समयसीमा सार्वजनिक की जानी चाहिए।
सवाल सीधा है—जब जनता के घरों तक नदी का पानी पहुंच रहा है, तब नगर पंचायत की व्यवस्था आखिर किस काम की है? गुण्डरदेही नगर पंचायत को साबित करना होगा कि उसका प्रशासन केवल सामान्य दिनों में नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में भी नागरिकों के साथ खड़ा है।



