प्रकाश नाहटा के पुत्र हर्षल नाहटा ने जी.के. पिल्लई और IRS जस्मीत सिंह के साथ साझा किया संवाद का अनुभव, छोटे शहर से राष्ट्रीय विधिक मंच तक पहुंचने की कहानी
गुण्डरदेही से महानगर तक हर्षल नाहटा की पेशेवर पहचान, पूर्व केंद्रीय गृह सचिव से मुलाकात बनी चर्चा का विषय

संपादक:- मीनू साहू
गुण्डरदेही/बालोद। बालोद जिले के गुण्डरदेही से निकलकर महानगर में विधि के क्षेत्र में अपनी पेशेवर पहचान बनाने वाले एडवोकेट हर्षल प्रकाश नाहटा की हालिया मुलाकात चर्चा में है। हर्षल नाहटा ने सोशल मीडिया पर साझा जानकारी में पूर्व केंद्रीय गृह सचिव जी.के. पिल्लई और वित्त मंत्रालय से जुड़े IRS जस्मीत सिंह के साथ ब्रंच मुलाकात का उल्लेख किया है। पोस्ट में उन्होंने राष्ट्रीय और वैश्विक विषयों से जुड़े दृष्टिकोणों पर संवाद को अपने लिए महत्वपूर्ण अनुभव बताया।
जी.के. पिल्लई भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1972 बैच के अधिकारी रहे हैं। उन्होंने IIT मद्रास से रसायन विज्ञान में एमएससी की और केंद्र सरकार में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालीं। वे 30 जून 2009 को भारत सरकार के गृह सचिव बने और जून 2011 में इस पद से सेवानिवृत्त हुए। IIT मद्रास के रिकॉर्ड में उनका उल्लेख संस्थान के पूर्व छात्र और 2011 के Distinguished Alumnus Award से सम्मानित व्यक्तित्व के रूप में भी है।
हर्षल नाहटा की पोस्ट के मुताबिक, मुलाकात के दौरान राष्ट्रीय और वैश्विक परिदृश्य से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। हालांकि बातचीत में किन-किन मुद्दों पर विस्तार से विचार हुआ, इसकी विस्तृत जानकारी पोस्ट में सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में मुलाकात को व्यापक विचार-विमर्श के अवसर के रूप में ही देखा जा सकता है।
हर्षल नाहटा गुण्डरदेही निवासी सामाजिक कार्यकर्ता एवं वरिष्ठ राजनीतिक नेता प्रकाश नाहटा के पुत्र हैं। स्थानीय पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने महानगर में विधिक क्षेत्र में काम किया है। उनके सार्वजनिक परिचय के अनुसार वे महाराष्ट्र सरकार की ओर से Additional Special Counsel के रूप में बॉम्बे हाईकोर्ट, गोवा में न्यायिक कार्यवाही से जुड़े मंचों तथा भारत के सर्वोच्च न्यायालय में विधिक दायित्व निभाते हैं। कानूनी पदों का वास्तविक स्वरूप संबंधित नियुक्ति आदेश और आधिकारिक अभिलेखों से निर्धारित होता है।
इस पूरे घटनाक्रम का स्थानीय पहलू इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि गुण्डरदेही जैसे छोटे शहर से निकलने वाला व्यक्ति जब मुंबई जैसे महानगर में पेशेवर क्षेत्र में अपनी जगह बनाता है, तो उसके सफर में स्थानीय पृष्ठभूमि और राष्ट्रीय स्तर के अवसरों का मेल दिखाई देता है।
प्रकाश नाहटा सामाजिक गतिविधियों के साथ सार्वजनिक जीवन में भी सक्रिय रहे हैं। उनके परिवार से जुड़े हर्षल की यात्रा हालांकि राजनीतिक गतिविधियों से अलग विधि के पेशेवर क्षेत्र में रही है। यही अंतर इस उपलब्धि को किसी राजनीतिक प्रचार के बजाय एक पेशेवर यात्रा के रूप में देखने का आधार देता है।
देश के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी रहे जी.के. पिल्लई के साथ संवाद ने इस यात्रा को एक अलग संदर्भ दिया है। प्रशासन, कानून और सार्वजनिक नीति से जुड़े विषयों में लंबे अनुभव रखने वाले व्यक्ति के साथ बातचीत किसी विधि विशेषज्ञ के लिए विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों को दूसरे दृष्टिकोण से समझने का अवसर हो सकती है।
गुण्डरदेही के संदर्भ में यह प्रसंग एक और सवाल सामने रखता है—क्या छोटे शहरों की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पर्याप्त अवसर मिल रहे हैं? हर्षल नाहटा का उदाहरण कम से कम यह दिखाता है कि स्थानीय पृष्ठभूमि से निकला व्यक्ति महानगर में प्रतिस्पर्धी पेशेवर क्षेत्र तक पहुंच बना सकता है।
यह कहानी किसी एक मुलाकात तक सीमित नहीं है। इसके पीछे शिक्षा, विधि व्यवसाय और वर्षों की पेशेवर गतिविधियों का क्रम है। हालिया मुलाकात उसी यात्रा की एक सार्वजनिक रूप से सामने आई कड़ी है।
गुण्डरदेही से निकलकर राष्ट्रीय विधिक क्षेत्र में सक्रिय होना स्थानीय स्तर पर इसलिए उल्लेखनीय है क्योंकि इससे जिले के युवाओं के सामने एक व्यावहारिक उदाहरण आता है—छोटे शहर से शुरुआत के बावजूद पेशेवर क्षेत्र का विस्तार राष्ट्रीय स्तर तक किया जा सकता है।



