संपादक:- मीनू साहू
बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के मार्री बंगला देवरी क्षेत्र में इन दिनों अराजकता का नाच देखने को मिल रहा है, जहां कानून का डर खत्म हो चुका है और पीताम्बर ठाकुर का दबंगई खुलेआम शासन को चुनौती दे रही है। तहसील कार्यालय के सामने ही निजी जमीन पर भवन निर्माण धड़ल्ले से किया जा रहा है, लेकिन उससे भी गंभीर मामला तब सामने आता है जब शासकीय जमीन पर बने रास्ते को जानबूझकर नष्ट कर किसानों की आवाजाही बाधित की जा रही है।किसानों ने अपने खून-पसीने की कमाई से नाले के ऊपर मुरूम डालकर एक वैकल्पिक रास्ता तैयार किया था, ताकि वे अपने खेतों तक आसानी से पहुंच सकें। लेकिन पीतांबर ठाकुर नामक व्यक्ति ने न केवल इस रास्ते को खोदकर बर्बाद कर दिया, बल्कि उस पर अतिक्रमण करते हुए अपनी मनमानी का खुला प्रदर्शन किया। इतना ही नहीं, शासकीय रास्ते पर दो कॉलम खड़ा कर पहले से ही कब्जा जमा रखा है और अब मिट्टी डालकर किसानों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई है।यह स्थिति केवल एक व्यक्ति की मनमानी नहीं, बल्कि प्रशासन की निष्क्रियता और लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण है। सवाल उठता है कि जब तहसील कार्यालय के सामने ही यह सब हो रहा है, तो जिम्मेदार अधिकारी आखिर किस बात का इंतजार कर रहे हैं? क्या उन्हें किसानों की परेशानी दिखाई नहीं दे रही या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं?और हैरानी की बात यह है कि कलेक्टर केवल बालोद शहर में दिखावटी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर रहे हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध कब्जों की बाढ़ आ चुकी है। यह दोहरा रवैया साफ तौर पर प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़ा करता है। क्या गांव के किसानों की कोई कीमत नहीं? क्या उनके अधिकारों को कुचलना अब सामान्य बात हो गई है?कलेक्टर महोदय से मांग है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए। दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो और किसानों को उनका रास्ता वापस दिलाया जाए। सामाजिक कार्यकर्ता सतीश सिंग ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अब भी प्रशासन नहीं जागा, तो यह अराजकता और बढ़ेगी और आम जनता का भरोसा पूरी तरह खत्म हो जाएगा जनता द्वारा फिर आंदोलन किया जाएगा।
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