बोरतरा में कागजी लाइसेंस से चल रहा कबाड़ का काला खेल, 20 मजदूर बंधक, अफसरों की मिलीभगत उजागर
बालोद जिला के गुरूर थाना अंतर्गत आने वाला ग्राम पंचायत है यह गांव

संपादक:- मीनू साहू
बालोद/गुरुर:- जिला बालोद में गुरुर विकासखंड के ग्राम बोरतरा में दादा कबाड़ी के बोर्ड तले जो धंधा फल-फूल रहा है, उसकी असलियत श्रम विभाग के पंजीयन क्रमांक बीएलडी/2026/49022943 ने खोल दी। प्रारूप-2 पर दर्ज जानकारी के मुताबिक प्रतिष्ठान की शुरुआत 30 जनवरी 2019 बताई गई, जबकि पंजीयन की तिथि 8 सितंबर 2026 है। बीच के 7 वर्षों में किस नियम से लोहा-प्लास्टिक खरीदा गया, इसका जवाब किसी फाइल में नहीं।दस्तावेज में कुल 20 श्रमिक दर्शाए गए हैं, जिसमें 10 महिलाएं शामिल हैं। परंतु ईएसआई और पीएफ के कॉलम में स्पष्ट रूप से ‘नहीं’ अंकित है। कानून कहता है 10 श्रमिक पर ईएसआई और 20 पर पीएफ अनिवार्य है, यहां दोनों से पल्ला झाड़ लिया गया। बिना सुरक्षा उपकरण, बिना बीमा कवर के महिलाओं को कबाड़ के ढेर में झोंकना सीधे शोषण की श्रेणी में आता है।सबसे बड़ा धोखा प्रमाण पत्र के नीचे छपे वाक्य में है, जहां विभाग स्वयं मानता है कि यह पंजीयन भौतिक सत्यापन के बिना, केवल स्व-प्रमाणित कागजों के आधार पर जारी हुआ है। अधिकारी संगीता के डिजिटल हस्ताक्षर से बोरतरा पहुंचे बिना ही मान्यता बांट दी गई।यह पहचान पत्र कारोबार का परमिट नहीं है। छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना अधिनियम 2017 केवल पहचान देता है। कबाड़ क्रय-विक्रय के लिए बोरतरा पंचायत का व्यापार लाइसेंस, जीएसटी पंजीकरण, पर्यावरण मंडल का प्राधिकार और श्रमिकों का ईएसआई-पीएफ अनिवार्य है। इनमें से एक भी वैध दस्तावेज दादा कबाड़ी के पास नहीं। फिर भी प्रमाण पत्र में लिखी चेतावनी “इससे संपत्ति या व्यवसाय के स्वामित्व का अधिकार नहीं मिलता” को नजरअंदाज कर गांव में खुलेआम खरीद-फरोख्त जारी है।यह स्थिति केवल एक दुकान की नहीं, पूरे बालोद जिले की लापरवाह व्यवस्था का प्रतीक बन चुकी है। प्रशासन को चाहिए तत्काल पंजीयन निरस्त कर स्थल जांच, अवैध संचालन पर अर्थदंड और श्रमिकों के हित में ईएसआई-पीएफ वसूली सुनिश्चित करे।



