बालोद जिला के गिधाली निको माइनिंग कंपनी में VIP कोटा पर उठे सवाल, प्रति ट्रिप ₹3500 से ₹4500 कमीशन लेने के आरोप से परिवहन व्यवस्था पर विवाद

संपादक:- मीनू साहू
बालोद/कुसुमकसा (गिधाली):- गिधाली स्थित निको माइनिंग कंपनी में आयरन ओर परिवहन व्यवस्था को लेकर स्थानीय वाहन मालिकों और जनप्रतिनिधियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि परिवहन कार्य में कथित रूप से “VIP कोटा“ के नाम पर बाहरी वाहनों को प्राथमिकता दी जा रही है। आरोप है कि प्रत्येक ट्रिप पर ₹3500 से ₹4500 तक कमीशन लेकर कुछ वाहनों को पहले लोडिंग की सुविधा दी जाती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और कंपनी प्रबंधन ने भी इस संबंध में जानकारी होने से इनकार किया है।
स्थानीय वाहन मालिकों का कहना है कि प्रतिदिन लगभग 25 से 30 ट्रक कथित VIP कोटा के माध्यम से परिवहन कार्य में लगाए जा रहे हैं। इससे क्षेत्र के कई स्थानीय वाहन मालिकों को नियमित काम नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट की स्थिति बन रही है। उनका आरोप है कि बाहरी वाहनों को प्राथमिकता मिलने से स्थानीय लोगों के हित प्रभावित हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने यह भी याद दिलाया कि कंपनी की स्थापना से पहले आयोजित जनसुनवाई में क्षेत्र की 11 ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने स्थानीय लोगों को रोजगार और परिवहन कार्य में प्राथमिकता देने की शर्त पर सहमति दी थी। स्थानीय पक्ष का कहना है कि अब उन वादों का अपेक्षित रूप से पालन नहीं हो रहा है, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
पूर्व जनपद सदस्य अनिल सुधार ने कहा कि जिन स्थानीय वाहन मालिकों की गाड़ियां अब तक स्थायी परिवहन कार्य से नहीं जुड़ पाई हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय युवाओं और वाहन मालिकों को रोजगार एवं व्यवसाय के अवसर उपलब्ध कराना कंपनी की सामाजिक जिम्मेदारी भी है।
वहीं, निको माइनिंग कंपनी, गिधाली के जीएम ललित कुमार ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कंपनी की भूमिका केवल आयरन ओर की लोडिंग और वाहनों को सुरक्षा के साथ रवाना करने तक सीमित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवहन ठेके का निर्धारण कंपनी के उच्च कार्यालय स्तर पर किया जाता है तथा कथित VIP कोटा या कमीशन संबंधी आरोपों की उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
फिलहाल स्थानीय वाहन मालिकों ने परिवहन व्यवस्था की निष्पक्ष जांच, पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा जनसुनवाई के दौरान किए गए वादों के अनुरूप स्थानीय वाहनों को प्राथमिकता देने की मांग उठाई है। अब देखना होगा कि संबंधित प्रबंधन और प्रशासन इन आरोपों और मांगों पर क्या कदम उठाते हैं।



