लोक आयोग के दरवाज़े पर कृषि विभाग! किसानों की शिकायतों का हिसाब कौन देगा
जवाबदेही से कब तक बचता रहेगा शासन?

संपादक :- मीनू साहू
बालोद :- छत्तीसगढ़ में नकली खाद, बीज, उर्वरक, कीटनाशक और जैव-उत्तेजकों के कथित अवैध कारोबार को लेकर अब मामला सीधे प्रशासनिक जवाबदेही तक पहुंच गया है। भारतीय किसान मोर्चा ने दावा किया है कि लगातार शिकायतों, दस्तावेजों, आरटीआई से प्राप्त अभिलेखों और शासन को भेजे गए अनेक ज्ञापनों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर अब छत्तीसगढ़ लोक आयोग के समक्ष मुख्य सचिव, पूर्व एवं वर्तमान कृषि सचिव, कृषि संचालक तथा कृषि मंत्री के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई गई है। संगठन का आरोप है कि किसानों से जुड़े गंभीर मामलों में शासन की चुप्पी और विभागीय निष्क्रियता ने पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने कहा कि पिछले लगभग दो वर्षों से कृषि विभाग को कथित अनियमितताओं के संबंध में लगातार प्रमाण, राजपत्र की प्रतियां, विभागीय पत्राचार और सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेज सौंपे जाते रहे, लेकिन अधिकांश शिकायतें फाइलों में ही दबकर रह गईं। उनका कहना है कि यदि समय पर प्रभावी कार्रवाई होती तो खरीफ सीजन में किसानों को नकली अथवा संदिग्ध कृषि आदानों से होने वाली संभावित परेशानियों से बचाया जा सकता था।
भारतीय किसान मोर्चा का दावा है कि मार्च 2025 में भारत सरकार द्वारा उर्वरक नियंत्रण आदेश (एफसीओ) में संशोधन किए जाने के बाद भी जैव-उत्तेजकों के पंजीकरण, गुणवत्ता नियंत्रण और बिक्री व्यवस्था को लेकर राज्य स्तर पर पर्याप्त निगरानी नहीं की गई। संगठन का आरोप है कि संशोधित नियमों की जानकारी समय पर उत्पादकों, वितरकों और विक्रेताओं तक नहीं पहुंचाई गई, जिससे कथित रूप से भ्रम की स्थिति बनी रही और किसानों के हित प्रभावित हुए।
संगठन ने बालोद मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में विक्रय किए गए “काला हीरा (ह्यूमिक एसिड)” उत्पाद का भी उल्लेख किया। उसका कहना है कि गुणवत्ता पर संदेह होने के बाद संबंधित अधिकारियों को शिकायत दी गई, लेकिन अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए। आरटीआई के माध्यम से प्राप्त लगभग 40 पृष्ठों के दस्तावेजों के अध्ययन के आधार पर संगठन ने विभिन्न प्रक्रियागत विसंगतियों का दावा करते हुए स्वतंत्र जांच की मांग दोहराई है।
भारतीय किसान मोर्चा का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद विभागीय स्तर पर केवल पत्राचार होता रहा, जबकि जमीनी कार्रवाई का अभाव बना रहा। संगठन का कहना है कि किसानों की समस्याओं पर संवाद स्थापित करने के बजाय उनकी आवाज़ को लगातार अनदेखा किया गया। मंत्रालय घेराव के दौरान भी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा चर्चा नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है।
संगठन ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कर दोषी पाए जाने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाए। साथ ही नकली एवं अमानक कृषि आदानों के विरुद्ध राज्यव्यापी अभियान चलाकर गुणवत्ता नियंत्रण, मूल्य निगरानी, शिकायत निवारण प्रणाली और किसानों की जवाबदेही सुनिश्चित करने वाली व्यवस्था तत्काल लागू की जाए।



