
संपादक:- मीनू साहू
दुर्ग:- दुर्ग जिला के जामगांव थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम डोंगी तराई निवासी सोनू का नाम कथित रूप से गौवंश पशुओं की अवैध तस्करी से जोड़कर स्थानीय स्तर पर चर्चाओं में है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से गौवंशों का संदिग्ध परिवहन जारी है, लेकिन जिम्मेदार विभाग प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय मूकदर्शक बना हुआ है। यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह न केवल पशु क्रूरता से जुड़ा गंभीर मामला है, बल्कि कानून-व्यवस्था पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
भारत में पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 (Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960) तथा विभिन्न राज्यों में लागू गौवंश संरक्षण संबंधी प्रावधानों के तहत पशुओं के साथ अमानवीय व्यवहार, क्षमता से अधिक संख्या में परिवहन, बिना वैध दस्तावेजों के ढुलाई अथवा अवैध व्यापार दंडनीय माना गया है। इसके बावजूद यदि गौवंशों की तस्करी निर्बाध रूप से जारी है, तो संबंधित एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय संदिग्ध गतिविधियां होने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। इसके बावजूद पुलिस, पशुपालन विभाग और अन्य जिम्मेदार अमले की ओर से कठोर एवं निरंतर कार्रवाई दिखाई नहीं देती। इससे यह धारणा मजबूत हो रही है कि अवैध कारोबार करने वालों के हौसले बुलंद हैं और कानून का भय लगातार कमजोर पड़ता जा रहा है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो क्षेत्र में गौवंशों की सुरक्षा पर गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है। प्रशासन को चाहिए कि संदिग्ध गतिविधियों की गहन पड़ताल कर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करे। साथ ही परिवहन मार्गों पर नियमित जांच अभियान चलाकर अवैध पशु तस्करी पर प्रभावी रोक लगाई जाए।
गौरतलब है कि किसी भी व्यक्ति को दोषी मानना न्यायिक प्रक्रिया का विषय है। यदि सोनू अथवा किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध लगाए जा रहे आरोपों की पुष्टि होती है, तभी उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसलिए संबंधित एजेंसियों से अपेक्षा है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर तथ्य सार्वजनिक करें और यदि आरोप निराधार हों तो उसे भी स्पष्ट किया जाए, ताकि सत्य सामने आ सके और कानून का राज स्थापित हो।



