मौत की मंडी बनी सड़क! फूंडा, कलंगपुर और गुंडरदेही के व्यापारियों के भूसा कारोबार पर उठे सवाल, सात मौतों के बाद भी प्रशासन बेखबर
धमतरी से राजनांदगांव तक बेलगाम ओवरलोड वाहनों का आतंक, आखिर किसके संरक्षण में चल रहा मौत का यह कारोबार?

संपादक :- मीनू साहू
बालोद :- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में धमतरी से पलारी, सनौद, अरमरी, रजोली, कलंगपुर, गुंडरदेही, अर्जुंदा और भरदाकला होते हुए राजनांदगांव तक का मार्ग इन दिनों आम लोगों के लिए सुरक्षित सड़क नहीं, बल्कि हर पल जानलेवा जोखिम का पर्याय बन चुका है। आरोप है कि फूंडा, कलंगपुर और गुंडरदेही क्षेत्र से जुड़े कुछ भूसा कारोबारियों के 60 से 70 ओवरलोड वाहन दिन-रात इस मार्ग पर दौड़ रहे हैं। क्षमता से कई गुना अधिक भूसा लादे इन वाहनों ने सड़क सुरक्षा को चुनौती दे दी है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन वाहनों में भूसा इतना अधिक भरा जाता है कि ट्रक और ट्रैक्टर-ट्रॉली का वास्तविक आकार तक दिखाई नहीं देता। कई फीट बाहर निकला लदान, निर्धारित सीमा से अधिक ऊंचाई और बिना सुरक्षा जाली के दौड़ते वाहन सड़क पर चलते-फिरते खतरे बन चुके हैं। इसके बावजूद परिवहन विभाग, पुलिस और संबंधित प्रशासनिक तंत्र की प्रभावी कार्रवाई कहीं दिखाई नहीं देती।
जानकारी के अनुसार सनौद, रनचिराई और गुंडरदेही थाना क्षेत्र में ऐसे ओवरलोड वाहनों से जुड़े हादसों में अब तक सात लोगों की जान जा चुकी है। कई परिवार उजड़ गए, लेकिन व्यवस्था की चुप्पी नहीं टूटी। सवाल यह है कि आखिर सात मौतों के बाद भी कार्रवाई का पहिया क्यों नहीं घूम रहा? क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?
राहगीरों का कहना है कि इन वाहनों से उड़ता भूसा आंखों में भर जाता है, दृश्य धुंधला हो जाता है और ओवरटेक करना मौत को दावत देने जैसा महसूस होता है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि ओवरलोड वाहन अचानक ब्रेक, मोड़ या तेज हवा में नियंत्रण खो सकते हैं, जिससे भीषण दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
सबसे बड़ा सवाल उन व्यापारियों और परिवहन नेटवर्क पर भी है जिनके आर्थिक लाभ के लिए आम नागरिकों की जान जोखिम में डाली जा रही है। यदि फूंडा, कलंगपुर और गुंडरदेही क्षेत्र से निकलने वाले ओवरलोड वाहन लगातार सड़क पर दिखाई दे रहे हैं, तो क्या संबंधित विभागों को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है?
ओवरलोड वाहनों में वजन क्षमता की अनिवार्य जांच, भारी जुर्माना, बार-बार नियम तोड़ने वालों के परमिट निलंबित करने जैसी कठोर कार्रवाई की जाए। यदि प्रशासन अब भी केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहता है, तो हर अगली दुर्घटना के साथ उसकी जवाबदेही पर सवाल और गहरे होते जाएंगे।



