हमर छत्तीसगढ़

पर्यावरण बचाने का सामूहिक संकल्प, विद्यार्थियों ने सीखा प्रकृति से जुड़ने का अनोखा तरीका

सीडबॉल तकनीक से अधिक वृक्षारोपण का संदेश, विद्यालय परिसर में दिखा उत्साह और सहभागिता

बीज से हरियाली की ओर कदम पीएम श्री विद्यालय सिरसिदा में सीडबॉल निर्माण एवं बीजारोपण अभियान से पर्यावरण संरक्षण का संदेश

पर्यावरण बचाने का सामूहिक संकल्प, विद्यार्थियों ने सीखा प्रकृति से जुड़ने का अनोखा तरीका सीडबॉल तकनीक से अधिक वृक्षारोपण का संदेश, विद्यालय परिसर में दिखा उत्साह और सहभागिता

संपादक:- मीनू साहू 

बालोदपर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने के उद्देश्य से पी.एम. श्री विद्यालय सिरसिदा में पर्यावरण गतिविधि, जिला बालोद के तत्वावधान में सीडबॉल निर्माण एवं बीजारोपण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों, स्वयंसेवकों और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर हरित भविष्य का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 10 बजे मुख्य अतिथि केशव साहू द्वारा ‘पंच परिवर्तन’ विषय पर प्रेरक कविता के साथ हुआ। कविता के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और वृक्षों के महत्व का संदेश दिया गया।

कार्यशाला में विनोद कुमार साहू (जिला सहकार्यवाह), कमलकांत साहू (पर्यावरण जिला संयोजक), योगेश्वर प्रसाद साहू (खण्ड संयोजक) सहित विद्यालय परिवार के प्रधानपाठक लीना देवांगन, धनेश्वरी साहू, महेन्द्र कुमार साहू, हीरालाल साहू, राकेश कुमार, दशेन्द्र कुमार साहू, गीतिका देशमुख, चन्द्रूलाल ठाकुर, बलराम मार्कण्डे (संकुल समन्वयक), डेनिश चन्द्राकर, जयेश चन्द्राकर एवं स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने चिकनी मिट्टी, वर्मीकम्पोस्ट और विभिन्न पौधों के बीजों से सीडबॉल तैयार किए। विशेषज्ञों ने बताया कि सीडबॉल (बीज बम) एक प्रभावी तकनीक है, जिसमें बीज को मिट्टी और खाद की परत से सुरक्षित कर प्राकृतिक रूप से अंकुरित होने योग्य बनाया जाता है। वर्षा होने पर यह परत गल जाती है और बीज आसानी से अंकुरित होकर पौधे का रूप ले लेता है।

इससे बीज पक्षियों और अन्य जीवों से भी काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं।वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की निरंतर जिम्मेदारी है। यदि समाज व्यापक स्तर पर सीडबॉल तकनीक अपनाए, तो कम लागत में अधिक क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाई जा सकती है तथा जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने अधिक से अधिक पौधे लगाने, उनकी देखभाल करने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

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