हमर छत्तीसगढ़

बालोद जिले के डौंडीलोहारा में तैनात मनीराम तारम का 10 करोड़ के भ्रष्टाचार का खुल गया पोल हो गया उसका डब्बा गोल

 

एंकर:- छत्तीसगढ़ बिजली विभाग में भ्रष्टाचार का करंट एक बार फिर तेज़ी से दौड़ा है। भ्रष्टाचार का राक्षस मनीराम तारम जो इस वक्त बालोद जिले के डौंडीलोहारा में पदस्थ हैं उनके ऊपर करोड़ों की वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा आरोप लगा है। CSPDCL (छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड) के जगदलपुर कार्यालय द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस ने विभाग की नींव हिला दी है।विभागीय अंकेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, जब मनीराम तारम कोण्डागांव संभाग में कार्यपालन अभियंता (संचा/संधा) के प्रभार में थे, तब उनके कार्यकाल में लगभग 8.99 करोड़ रुपए के ठेके नियमों को ताक पर रखकर अयोग्य ठेकेदारों को दे दिए गए। दस्तावेजों की जाँच-पड़ताल किए बिना ही भुगतान पारित कर देना उनके “कार्यशैली” का हिस्सा बन चुका था।

मेसर्स मयूर इलेक्ट्रिकल रायपुर, शिवम इंटरप्राइजेज बिलासपुर, बी.डी. कंस्ट्रक्शन बेमेतरा, और पंकज इलेक्ट्रिकल्स केशकाल जैसे ठेकेदारों को बिना वैध लेबर लाइसेंस, GST, EPF, और ESIC प्रमाणपत्र के काम और भुगतान दोनों दे दिए गए। CSPDCL के नियमों के मुताबिक एल-1 ठेकेदार को कार्यादेश मिलने के 30 दिन के भीतर सभी वैध दस्तावेज जमा करना होता है, लेकिन मनीराम तारम ने न केवल इस प्रक्रिया को दरकिनार किया, बल्कि इन अधूरे दस्तावेजों को “कानूनी” ठहराकर करोड़ों की रकम पारित कर दी।

विभागीय सूत्रों के मुताबिक, तारम ने जानबूझकर अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ा और ठेकेदारों से मिलीभगत कर सरकारी धन का खुला दुरुपयोग किया। अब सवाल उठ रहा है कि क्या यह केवल एक व्यक्ति की करतूत है या फिर इसके पीछे पूरा भ्रष्ट नेटवर्क सक्रिय है, जो कोण्डागांव से लेकर बालोद तक फैला हुआ है।बालोद जिले के डौंडीलोहारा में पदस्थ रहते हुए भी मनीराम की कार्यशैली को लेकर आक्रोश है। लोग खुलेआम कह रहे हैं कि “जहां मनीराम, वहां भ्रष्टाचार!” विभाग के अंदर और बाहर दोनों जगह इस इस व्यक्ति ने हड़कंप मचा दिया है।अब सबकी नज़रें CSPDCL प्रबंधन पर हैं — क्या मनीराम तारम जैसे अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी, या यह मामला भी विभागीय फाइलों में दफन कर दिया जाएगा? जनता का सवाल साफ है:

जब लाखों उपभोक्ता ईमानदारी से बिल भरते हैं, तो उनके पैसों से ऐसे भ्रष्ट अफसरों की जेबें क्यों भरी जाती हैं?

सामाजिक कार्यकर्ता मोहन निषाद ने कहा कि

बिजली विभाग के भीतर यह मामला एक चेतावनी है — कि अगर ऐसे “करंटखोर अफसर” बचे रहे, तो जनता का भरोसा जलकर राख हो जाएगा।

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