हमर छत्तीसगढ़

फर्जी प्रमाण पत्र पर नौकरी का खेल! शिक्षा विभाग की मिलीभगत से सिस्टम हुआ बेनकाब

 

संपादक :- मीनू साहू 

जांच में खुलासा—नियुक्ति में गड़बड़ी, फिर भी कार्रवाई ठंडी जिम्मेदारों पर सवाल

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर कठघरे में है। सामने आए आधिकारिक दस्तावेज ने यह साफ कर दिया है कि फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पाने का गंभीर मामला सामने आया, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ढीली कार्यवाही ने पूरे सिस्टम की नीयत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।संभागीय संयुक्त संचालक, शिक्षा विभाग दुर्ग द्वारा 22 अक्टूबर 2024 को जारी पत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि देवनारायण सिन्हा (व्याख्याता, एल.बी.) शा. उ. मा. स्कूल, सोरर, विकासखंड गुरूर, जिला बालोद की नियुक्ति के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियां पाई गईं।

जांच में सामने आया कि कार्यभार ग्रहण प्रतिवेदन में बी.एड. (भारतीय शिक्षा परिषद) का उल्लेख किया गया, जिसे यूजीसी द्वारा अमान्य घोषित किया जा चुका है। इतना ही नहीं, सेवा पुस्तिका में भी शैक्षणिक योग्यता को काट-छांट कर डी.एड. दर्शाया गया, जो सीधा-सीधा फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है।

यह पूरा मामला विकासखंड शिक्षा अधिकारी गुंडरदेही और सहायक अधिकारी श्रीमती उमा ठाकुर के संयुक्त जांच में सामने आया। रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि नियुक्ति संदिग्ध है और इसे निरस्त करने की अनुशंसा भी की गई है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब इतनी गंभीर गड़बड़ी उजागर हो चुकी है, तो अब तक सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्यशैली यहां पूरी तरह संदेह के घेरे में नजर आती है। क्या यह केवल एक व्यक्ति का मामला है या इसके पीछे एक संगठित खेल चल रहा है? क्या अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी प्रमाण पत्र धारकों को सरकारी नौकरी में जगह दी जा रही है?

सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिन विभागों पर शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने की जिम्मेदारी है, वही विभाग भ्रष्टाचार के दलदल में डूबते नजर आ रहे हैं। यदि समय रहते ऐसे मामलों में कठोर और पारदर्शी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता को पूरी तरह खत्म कर देगा।

अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और राज्य शासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाते हैं, या फिर यह भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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