हमर छत्तीसगढ़

प्रशासनिक अमला इस तरह की हरकत कर शायद भाजपा को छत्तीसगढ़ में हराने की साजिश रच रहे हैं।

संपादक :- मीनू साहू 

सच दिखाने वालों को डराने की साजिश?”आबकारी विभाग पर गंभीर सवाल, पत्रकारों और आम नागरिकों को झूठे मामलों में फंसाने के आरोप

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सामने आए दस्तावेज और बयान यह संकेत दे रहे हैं कि जो व्यक्ति अवैध गतिविधियों या संदिग्ध व्यवस्थाओं की सच्चाई उजागर करने की कोशिश करता है, उसे दबाने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का खेल शुरू हो जाता है।मामले में सामने आए कथन के अनुसार संबंधित व्यक्ति ने साफ तौर पर कहा है कि उसने किसी से अवैध मांग, धमकी या अभद्र व्यवहार नहीं किया, बल्कि जो गतिविधि संदिग्ध लगी उसका वीडियो बनाकर सार्वजनिक किया। इसके बावजूद शिकायत और दबाव की कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।स्थानीय लोगों का आरोप है कि आबकारी विभाग के आसपास ऐसा माहौल बना दिया गया है जहां सच बोलना ही सबसे बड़ा अपराध माना जाता है। यदि कोई व्यक्ति सवाल पूछे, वीडियो बनाए या व्यवस्था की पोल खोले, तो उसे बदनाम करने, झूठे आरोप लगाने और कानूनी दबाव में फंसाने की कोशिश शुरू हो जाती है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर सच उजागर करने वालों से इतनी घबराहट क्यों? क्या विभाग के भीतर चल रही गड़बड़ियों को छुपाने के लिए डर और दबाव की नीति अपनाई जा रही है? यदि आरोप झूठे हैं तो निष्पक्ष जांच सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती?जनता अब यह जानना चाहती है कि क्या सरकारी तंत्र का इस्तेमाल भ्रष्ट और संदिग्ध गतिविधियों को बचाने के लिए किया जाएगा, या फिर निष्पक्ष जांच कर दूध का दूध और पानी का पानी किया जाएगा। क्योंकि लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं, जनता का अधिकार है।

Related Articles

Back to top button