अतिक्रमण पर बुलडोज़र, लेकिन जनता की मूल समस्याओं पर खामोशी!
पलारी नगर पंचायत में कार्रवाई या केवल दिखावटी सख्ती?

*ब्यूरो रिपोर्ट*
पलारी (बालोद):- नवगठित नगर पंचायत पलारी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तेज़ होती दिखाई दे रही है। सड़कों और सार्वजनिक स्थलों से कब्ज़े हटाए जा रहे हैं। पहली नज़र में यह व्यवस्था सुधारने की पहल लगती है, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठने लगे हैं कि क्या केवल अतिक्रमण हटाना ही जनप्रतिनिधियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है, या फिर जनता की रोजमर्रा की परेशानियों का समाधान भी उतनी ही गंभीरता से होना चाहिए।
नगर पंचायत के नव निर्वाचित अध्यक्ष यानेश साहू के कार्यकाल की यह शुरुआती बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। समर्थक इसे प्रशासनिक सक्रियता बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई नागरिकों का कहना है कि नगर की मूलभूत समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं। जगह-जगह खराब सड़कें, जल निकासी की अव्यवस्था, पेयजल संकट, सफाई व्यवस्था की शिकायतें और अन्य नागरिक सुविधाओं की कमी लंबे समय से लोगों को परेशान कर रही हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या इन मुद्दों पर भी उतनी ही तत्परता दिखाई जाएगी?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई का केंद्र केवल अतिक्रमण तक सीमित दिखाई दे रहा है, जबकि नगर की बदहाल व्यवस्थाओं पर अपेक्षित गंभीरता नज़र नहीं आ रही। जनता का कहना है कि विकास केवल बुलडोज़र चलाने से साबित नहीं होता, बल्कि तब साबित होता है जब आम नागरिक को बुनियादी सुविधाएं समय पर मिलें और उसकी समस्याओं का स्थायी समाधान हो।
अतिक्रमण हटाने की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी हो। यदि कार्रवाई केवल चुनिंदा लोगों तक सीमित रही और प्रभावशाली व्यक्तियों पर अलग रवैया अपनाया गया, तो निष्पक्षता पर सवाल उठना तय है। प्रशासन और नगर पंचायत को यह स्पष्ट करना होगा कि कार्रवाई किन मानकों के आधार पर की जा रही है और क्या सभी अतिक्रमणकारियों पर समान नियम लागू किए जा रहे हैं।
जनता अब केवल घोषणाएं या प्रतीकात्मक कार्रवाई नहीं, बल्कि परिणाम चाहती है। नगर की वास्तविक तस्वीर तब बदलेगी जब अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ पेयजल, सड़क, सफाई, जल निकासी, प्रकाश व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाओं पर भी समान गंभीरता से काम होगा। अन्यथा यह धारणा मजबूत होती जाएगी कि सुर्खियां बटोरने वाली कार्रवाई तो हो रही है, लेकिन आम नागरिक के दुख-दर्द अब भी व्यवस्था की प्राथमिकताओं से दूर हैं।



