“राष्ट्रगीत के स्वर से गूँजा गुजरा (बालोद) — प्रधानमंत्री का संदेश बच्चों ने हृदय से आत्मसात किया”

बालोद:- 7 नवंबर 2025 को देशभर में वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पूरे गौरव और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर दूरदर्शन के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कार्यक्रम का प्रसारण सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक किया गया। छत्तीसगढ़ में बालोद जिले के विद्यालयों में विद्यार्थियों ने इस कार्यक्रम को बड़े ध्यान और गर्व के साथ देखा।प्रसारण के दौरान प्रधानमंत्री ने राष्ट्रगीत के रचयिता बंकिमचंद्र चटर्जी को नमन करते हुए कहा कि “वंदे मातरम् कोई सामान्य गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का स्वर है।” उन्होंने कहा कि इन दो शब्दों में सम्पूर्ण राष्ट्र की शक्ति, श्रद्धा और मातृभूमि के प्रति भक्ति समाहित है। प्रधानमंत्री ने इसे माँ भारती की आराधना और देशभक्ति का महामंत्र बताया।प्रधानमंत्री के संदेश ने देशभर के बच्चों के हृदय में नई ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने यह भी कहा कि “जब हम वंदे मातरम् कहते हैं, तो हम अपने भीतर एक नई चेतना का अनुभव करते हैं — यह नमन है उस धरती को, जिसने हमें जीवन और पहचान दी।”बालोद के विद्यालय में प्रधानपाठक श्रीमती अनीता सुधाकर, संकुल समन्वयक राकेश सेन, शिक्षक टी.एस. धनकर, श्रीमती दमयन्ती, कुमारी रेखा जोशी और अन्य शिक्षकगणों की उपस्थिति में विद्यार्थियों ने कार्यक्रम का अवलोकन किया। बच्चे राष्ट्रगीत की धुन पर भावविभोर होते दिखे। कई विद्यार्थियों ने प्रसारण के बाद अपने अनुभव साझा किए कि प्रधानमंत्री का संबोधन सुनकर उनमें देशसेवा की भावना और आत्मविश्वास और भी प्रबल हुआ।कार्यक्रम के उपरांत विद्यालय परिसर में वंदे मातरम् का सामूहिक गान आयोजित किया गया। पूरा वातावरण देशभक्ति के सुरों से गूँज उठा। प्रधानपाठक ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि “यह गीत हमें बताता है कि जब हम एकजुट होते हैं, तब कोई शक्ति हमें विभाजित नहीं कर सकती। वंदे मातरम् हमारे राष्ट्र का गौरव है, जो हर पीढ़ी को प्रेरणा देता रहेगा।”संकुल समन्वयक राकेश सेन ने कहा कि यह केवल स्मरण दिवस नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है। हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि राष्ट्रहित सर्वोपरि रहेगा।इस अवसर पर विद्यालय में निबंध लेखन, पोस्टर निर्माण और भाषण प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। बच्चों ने वंदे मातरम् की भावना को अपनी रचनाओं में व्यक्त किया। शिक्षकों ने बताया कि राष्ट्रगीत के माध्यम से बच्चों में देश के प्रति कर्तव्य, अनुशासन और प्रेम की भावना स्वाभाविक रूप से विकसित होती है।कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और भारत माता के जयघोष से हुआ। उपस्थित सभी ने महसूस किया कि वंदे मातरम् केवल ध्वनि नहीं, बल्कि आत्मा का वह स्पंदन है जो भारतीयता की पहचान है। इस अवसर ने बच्चों को न सिर्फ इतिहास से जोड़ा, बल्कि उन्हें भविष्य के जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा भी दी।



