हमर छत्तीसगढ़

अटल जी की प्रतिमा केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि विचार और प्रेरणा का प्रतीक है।

बालोद के जय स्तंभ चौक में अटल जी की प्रतिमा स्थल पर ठेकेदार और प्रशासन की खुली लापरवाही!”  “लोकार्पण से पहले ढह गया गौरव का प्रतीक 

बालोद:- छत्तीसगढ़ की धरती पर जब ‘विकास पुरुष’ के नाम से विख्यात भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा की स्थापना की घोषणा हुई थी, तब पूरे जिले में उत्साह की लहर दौड़ गई थी। लेकिन लोकार्पण से पहले ही जय स्तंभ चौक में बन रहे इस स्मारक स्थल का एक हिस्सा ढह जाना न केवल प्रशासनिक संवेदनहीनता को उजागर करता है, बल्कि ठेकेदारी व्यवस्था की सच्चाई को भी बेनकाब कर गया है।

सामाजिक संगठन प्रदेश हिंद सेना के संयोजक तरुण नाथ योगी ने बताया कि

मूर्ति स्थल की सुंदरता बढ़ाने के नाम पर जिस पिलर (स्तंभ) का निर्माण किया गया था, वह लोकार्पण से पहले ही धराशायी हो गया। इस घटना ने सवालों का पहाड़ खड़ा कर दिया है — अगर अभी यह हाल है, तो चार या छह महीने बाद इस निर्माण की हालत क्या होगी? जनता अब यह जानना चाहती है कि क्या यही है वह “स्मार्ट निर्माण” जिसकी दुहाई ठेकेदार और प्रशासन देते हैं?स्थानीय नागरिकों ने निर्माण स्थल का मुआयना करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। लोगों ने कहा कि यह हादसा किसी दुर्घटना का परिणाम नहीं, बल्कि घोर लापरवाही और भ्रष्टाचार की देन है। बिना गुणवत्ता जांच के सामग्री उपयोग करना, जल्दबाजी में कार्य पूरा दिखाना और उद्घाटन से पहले चमकाने की कोशिश — यही ठेकेदारी संस्कृति का चेहरा है।जिला प्रशासन और ठेकेदार दोनों पर उंगलियां उठ रही हैं। नागरिकों का आरोप है कि कार्य की निगरानी करने वाले अधिकारी सिर्फ कागज़ों में सक्रिय हैं। मौके पर गुणवत्ता जाँच का नामोनिशान नहीं। ठेकेदार ने जो काम दिखाया, उसे प्रशासन ने बिना परखे पास कर दिया। अब जब दीवारें और पिलर खुद जवाब देने लगे हैं, तो जिम्मेदारी एक-दूसरे पर टालने का खेल शुरू हो गया है।भाजपा के शासनकाल में अटल जी के नाम पर बने इस स्थल का यह हाल और भी शर्मनाक है। जिस महापुरुष ने देश को विकास और पारदर्शिता की पहचान दी, उनके नाम पर बनी संरचना में भ्रष्टाचार और उदासीनता झलक रही है। यह न केवल अटल जी की विरासत का अपमान है, बल्कि जनता के विश्वास पर चोट भी।जनता अब सवाल कर रही है — जब उद्घाटन से पहले ही ढांचा गिर रहा है, तो बरसात और समय की मार झेलने के बाद इस स्थल की स्थिति क्या होगी? क्या प्रशासन फिर किसी हादसे का इंतज़ार कर रहा है?अब ज़रूरत है कि जिला प्रशासन तत्काल जांच कर जिम्मेदार ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई करे। क्योंकि अटल जी की प्रतिमा केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि विचार और प्रेरणा का प्रतीक है। और अगर उस प्रतीक के नीचे ही भ्रष्टाचार की नींव रख दी जाए, तो यह प्रदेश की आत्मा को ठेस पहुँचाने जैसा होगा।बालोद की जनता ने साफ चेतावनी दी है — “अगर अटल जी के नाम पर घटिया काम हुआ है, तो यह सिर्फ निर्माण नहीं, श्रद्धा का भी अपमान है।”

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