महतारी सदन स्कूल के कला-संस्कृति कक्ष का भूमिपूजन समारोह उत्साहपूर्वक करहीभदर में संपन्न

बालोद :-छत्तीसगढ़ में बालोद जिले के करहीभदर ग्राम में आज का दिन विकास और संस्कृति के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया। महतारी सदन स्कूल परिसर में कला-संस्कृति कक्ष (टीन शेड) निर्माण हेतु भूमिपूजन समारोह बड़े ही हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। इस गरिमामय अवसर पर क्षेत्र की जनता ने एकजुट होकर मातृशक्ति और सांस्कृतिक उत्थान के इस प्रयास का स्वागत किया।समारोह के मुख्य अतिथि सांसद भोजराज नाग ने विधिवत पूजा-अर्चना कर भूमिपूजन किया और कहा कि यह भवन केवल एक निर्माण नहीं, बल्कि क्षेत्र की संस्कृति, शिक्षा और सृजनशीलता का प्रतीक बनेगा। उन्होंने कहा कि “मातृशक्ति जब सशक्त होती है, तभी समाज में समरसता और विकास का वातावरण बनता है।”इस अवसर पर विधायक संगीता सिन्हा, जिला पंचायत अध्यक्ष तारणि पुष्पेंद्र चंद्राकर
भारतीय रेड क्रॉस सोसायटी के
चेयरमैन व जिला पंचायत उपाध्यक्ष तोमन साहू जनपद अध्यक्ष सरस्वती टेमरिया उपाध्यक्ष दिनेश सिन्हा, मंडल अध्यक्ष धर्मेंद्र साहू, राकेश यादव, दीप साहू, लोकेश सिन्हा, बसंत तराम (सरपंच), गणेश साहू, देवघर साहू, दयानंद साहू, जगेश्वर साहू, कमला भूतड़ा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।कार्यक्रम में वक्ताओं ने महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण, शिक्षा की भूमिका तथा स्थानीय कला-संस्कृति के संरक्षण पर विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि यह “कला-संस्कृति कक्ष” ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा, जहाँ महिलाएँ, छात्र और कलाकार अपनी रचनात्मकता को नए आयाम देंगे।सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह को और अधिक भव्य बना दिया। स्वसहायता समूह की महिलाओं ने लोकनृत्य और गीतों के माध्यम से मातृशक्ति का गौरवगान किया, जिससे उपस्थित जनसमूह मंत्रमुग्ध हो उठा। कार्यक्रम के अंत में स्वच्छता शपथ ली गई, जिसमें सभी ने स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दोहराया।सांसद भोजराज नाग ने अपने उद्बोधन में ग्रामीणों से कहा — “यह भवन केवल दीवारों का ढांचा नहीं, बल्कि आपकी आस्था, आपकी परंपरा और आपके विकास का केंद्र बनेगा। इससे आने वाली पीढ़ियाँ अपनी जड़ों से जुड़ी रहेंगी।”इस आयोजन ने ग्रामीण अंचल में नई ऊर्जा का संचार किया है। करहीभदर का यह सांस्कृतिक पहल न केवल शिक्षा के क्षेत्र में एक नई दिशा प्रदान करेगा, बल्कि स्थानीय कला और परंपराओं को भी मंच उपलब्ध कराएगा।यह कहा जा सकता है कि महतारी सदन स्कूल का यह नया अध्याय बालोद जिले के लिए एक प्रेरक उदाहरण बनेगा — जहाँ मातृशक्ति, संस्कृति और शिक्षा का संगम समाज को आत्मनिर्भर और जागरूक दिशा में अग्रसर करेगा।



